तुम न उनसे हार जाना...
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तुम न उनसे हार जाना
राह में अगणित भले अवरोध आयें
रोक देने को तुझे प्रतिरोध आयें
भौंह टेढ़ी कर प्रचण्ड विरोध आयें
तमतमाये लाल पीले क्रोध आयें
किन्तु रण में पीठ अपनी न दिखाना
तुम न उनसे हार जाना।
राह तेरी हो भले तूफान वाली
शोर झंझा कर रहा हो, रात काली
टूटते हों वर विटप, बिखरी हो डाली
यूँ लगे ज्यों अब न हो सूरज की लाली
किन्तु इनके बीच अपना पथ बनाना
तुम न उनसे हार जाना।
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थके हारे कदम तेरे डगमगायें
यूँ लगे ज्यों भार तन का सह न पायें
हौसला तेरा तुझे ही आजमाये
सांस आती क्या पता फिर लौट पाये
किन्तु तुम इस पीर को साथी बनाना
तुम न उनसे हार जाना।
समय को मत व्यर्थ खोना, कीमती है
सूचिका अविरल समय की घूमती है
अथक श्रम के पद सफलता चूमती है
और कर में जय पताका झूमती है
है तुझे हर कण्टकों के पार जाना
तुम न उनसे हार जाना।
विंध्याचल सिंह
बुढ़ऊं, बलिया, उत्तर प्रदेश

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