होलिका दहन एक आध्यात्मिक संदेश : ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय से जानिएं राशि के अनुसार उपाय

होलिका दहन एक आध्यात्मिक संदेश : ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय से जानिएं राशि के अनुसार उपाय

बलिया : होलिका दहन हमारे अंदर के अहंकार और अन्य बुराइयों को अग्नि में विसर्जित कर देने का प्रतीक है। अहंकार के मिटने के बाद ही हमारे भीतर प्रेम का उदय होता है और समाज में सतरंगी समरसता आती है। होलिका दहन को अग्नि उपासना का पर्व बताया गया है। कुछ पुराणों में इसे 'फाल्गुनिका' भी कहा जाता है। 'होलिका' शब्द का अर्थ अग्नि की रक्षिका होता है और इसी का होम-संबंध 'होली' नाम से जुड़ गया। होलिका से संबंधित होने के कारण ही, अग्नि में सेंके गए अन्न (जैसे चने, गेहूँ आदि) अन्नो का नाम 'होलरा' पड़ गया।

मघा नक्षत्र में होगा होलिका दहन 
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रदोष काल में सूर्यास्त पश्चात जब क्षितिज पर कुछ तारागढ़ दृश्य हो तथा भद्रा रहित शुद्ध पूर्णिमा तिथि में होलीका दहन करना चाहिए। यदि इस दिन भद्रा रहित शुद्ध पूर्णिमा तिथि का अभाव हो तो भद्रा के मुख को त्याग कर भद्रा के पूछ में होलिका दहन करना चाहिए। भादरा में होलिका दहन का निषेध है। क्योंकि भद्रा में होलिका दहन करने से राष्ट्र व साधक का नाश होना कहा गया है। फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च सोमवार को शाम को 5 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ होगी जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। सूर्यास्त 5 बजकर 46 मिनट पर होगा।

दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रिपरयंत भद्रा होने से भद्रा के पुँछ में रात्रि 12:50 से रात्रि 2:02 के मध्य होलिका दहन किया जाएगा। इसके दूसरे दिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है। दिनांक 4 मार्च चैत्र कृष्ण प्रतिपदा दिन बुधवार को होली बसंत उत्सव सर्वत्र मनाया जाएगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता अवश्य अर्पित करना चाहिए।अगर मन में अंजना भय बना रहता है तो एक  सूखा जटा वाला नारियल, काला तिल व पीली सरसों एक साथ लेकर उसे सात बार अपने सिर के ऊपर उतारकर जलती होलिका में समर्पित करदे। होलिका दहन के अगले दिन होलिका की राख को घर पर लाकर उसमें थोड़ी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इससे नजर दोष से मुक्ति मिलती है।

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राशि के अनुसार होलिका दहन के उपाय
मेष : गुड़, लाल मसूर की दाल अर्पित करें। इससे ऊर्जा और सफलता की प्राप्ति होगी।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत के लिए जटा वाला नारियल अर्पित करें।
वृषभ : आर्थिक स्थिरता के लिए कपूर या सरसों के दाने का प्रयोग करे।परिवारिक सुख समृद्धि में वृद्धि के लिए सफेद चंदन और चीनी को अर्पित करें।
मिथुन : चने की दाल या गुड़ अर्पित करें, इससे मानसिक उलझनें दूर होगी। रोजगार से जुड़े दिक्कतों के लिए धनिया या लौंग को अर्पित करे।
कर्क : पलाश की लकड़ी, सौंफ या अनाज की बालियां (गेहूं/जौ) अर्पित करें। इससे घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होगी।
सिंह : मदार की लकड़ी या जौ अर्पित करें। इससे आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
कन्या : एक मुट्ठी पीली सरसों अर्पित करें, जिससे कर्ज से मुक्ति मिलेगी।नकारात्मक ऊर्जा के समाप्ति के लिए काले तिल अर्पित करे।
तुला : हवन सामग्री, मिश्री या हल्दी की गांठ अर्पित करें।
इससे जीवन में संतुलन और आर्थिक उन्नति की प्राप्ति होगी।
वृश्चिक : धान (चावल) या लाल फूल अर्पित करें, इससे भावनात्मक शुद्धि होगी।
कर्जों और शत्रुओं से मुक्ति के लिए मसूर की दाल को अर्पित करे।
धनु : पीपल की लकड़ी, गुड़, या जौ अर्पित करें, जिससे भाग्य का साथ मिलेगा।
मकर: शमी की लकड़ी, उड़द की दाल या काले तिल अर्पित करें, इससे शनि के कष्ट कम होंगे। इससे पारिवारिक कलह और वाद-विवाद दूर होंगे।
कुंभ : कार्य में आ रहे बाधाओं के लिए काले चने, या सरसों का तेल अर्पित करें।
मीन : पीपल की लकड़ी, हल्दी की गांठ, या जीरा अर्पित करें, इससे आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य में वृद्धि होगी।

ज्योतिषाचार्य
डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय  इंद्रपुर, थम्हनपुरा, बलिया

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