चंद्र ग्रहण पर विशेष : ज्योतिषाचार्य डॉ अखिलेश उपाध्याय से जानिएं खास बातें

चंद्र ग्रहण पर विशेष : ज्योतिषाचार्य डॉ अखिलेश उपाध्याय से जानिएं खास बातें

चंद्र ग्रहण पर विशेष
इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण (3 मार्च 2026) को लगने वाला खग्रास चन्द्रग्रहण भारत में  ग्रस्तोदित खंडचंद्रग्रहण ग्रहण के रुप में दृश्य होगा। यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशान्त महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। चन्द्रास्त के समय ग्रहण का प्रारम्भ प्रारम्भ अर्जेन्टिना, पराग्वे के कुछ भाग, बोलीविया, ब्राजील, ग्रीनलैंड और उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।

चन्द्रोदय के समय ग्रहण का अन्त रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिन्द महासागर में दिखाई देगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का प्रारम्भ दिन में 3 बजकर 20 मिनट पर, मध्य सायं 5 बजकर 4 मिनट पर तथा मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा।

चन्द्रोदय के समय भारत के सभी स्थानों में इस ग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा। इस ग्रहण का प्रारम्भ भारत के किसी स्थान में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चन्द्रोदय होने से पूर्व ग्रहण प्रारम्भ हो जाएगा। खग्रास चन्द्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खण्ड चन्द्रग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। काशी में चंद्रोदय 5 बजकर 59 पर  व मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा । काशी में सूतक प्रातः 8:58 बजे से आरंभ होगा। जिसके चलते सभी मंदिर के कपाटबंद हो जाएंगे। 

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मत्स्य पुराण के अनुसार धार्मिक एवं ज्योतिष आधार पर राहु चंद्रमा को ग्रसता है। अमृत पान की घटना से क्रोधित होकर दोनों छाया ग्रह राहु-केतु सूर्य व चंद्रमा से प्रतिकार लेने के लिए पीछे लगे रहते हैं, जैसे ही दोनों का सामना सूर्य से होता है तो ग्रहण का संयोग बन जाता है दूसरी ओर वैज्ञानिकों के अनुसार जब सूर्य व पृथ्वी के बीच जब चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण लगता है और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्र ग्रहण लगता है। 

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ग्रहण सूतक
धर्म शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण में 9 घंटा पूर्व (पहले) ग्रहण का सूतक लग जाता है। इसमें बालक,वृद्ध और रोगी को छोड़ कर अन्य लोगों के लिए भोजन निषेध है। शास्त्रीय वचन के अनुसार भोजन निवृति के साथ - साथ धार्मिक कृत्य श्राद्ध,दान आदि भी करना चाहिए। ग्रहण में जपा गया मंत्र सिद्धिप्रद होता है। ग्रहण काल में, दीर्घशंका, लघुशंका भोजन व पूजा नहीं करना चाहिए। लेकिन बालक, वृद्धि, रोगी व गर्भवती स्त्री के लिए यह निषेध नहीं माना गया है। ग्रहण काल में ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। घर में रखे अनाज या खाने की कच्ची वस्तु में दूर्वा या तुलसी या कुश डाल देना चाहिए। ग्रहण काल में  गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि ग्रहण के समय निकलने वाली नकारात्मक किरणे माता और शिशु के स्वास्थ्य पर नुकसान पहुंचती है। 

ग्रहणफल
मेष - चिंता
वृष - व्यथा
मिथुन - श्री
कर्क - क्षति
सिंह - घाट 
कन्या - हानि
तुला - लाभ
वृश्चिक - सुख
धनु - माननाश
मकर - मृत्यतुल्य कष्ट
कुंभ - स्त्री कष्ट
मीन - सौख्य

ज्योतिषाचार्य
डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय 
इंदरपुर, थम्हनपुरा ,बलिया
सम्पर्क सूत्र : 9918861411

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