आदि-अनादि हैं भगवान शिव : डॉ. अखिलेश उपाध्याय

आदि-अनादि हैं भगवान शिव : डॉ. अखिलेश उपाध्याय

फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शैव सम्प्रदाय के अधिष्ठाता, भगवान शिव के अग्निलिंग के रूप में प्रकटोत्सव का दिन महाशिवरात्रि 15 फरवरी  2026 को मनाया जा रहा है। शिव पुराण के ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए...

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:।

अतः सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर रूद्र के रूप में प्रजापिता ब्रह्मा के शरीर से प्रकट हुए थे। इस दिन पानी में काले तिल डाल कर स्नान करके, उपवास के साथ, शिव की आराधना और यथासंभव सामग्री घी, शहद,बिल्वपत्र,सफेद फूल, चन्दन, धतूरा, अबीर, गुलाल फल, बेर, दूध, भांग आदि शिव को अर्पित करना चाहिए। चार प्रहर में उमा महेश्वर की पूजा करते है तो अभिषेक के जल में शिवजी को पहले पहर में पानी, दूसरे पहर में घी, तीसरे पहर में दही और चौथे पहर में शहद  को मुख्यत: शामिल करना है। इससे सौभाग्य की प्राप्ति के साथ समस्त रोगों का समन होगा। कुंवारी कन्याओं को इस दिन व्रत करने से वैवाहिक अड़चन दूर होने के साथ योग्य वर के प्राप्ति के योग बनेंगे।

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ग्रह-नक्षत्रों की दुर्लभ स्थिति के कारण इस दिन 300 साल बाद बेहद खास 12 शुभ योग और 4 राजयोग एक साथ रहेंगे। 
बुधादित्य राजयोग: सूर्य-बुध की युति से
लक्ष्मी नारायण राजयोग: बुध-शुक्र की युति से
शुक्रादित्य योग: सूर्य-शुक्र की युति से
चतुर्ग्रही योग - कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की युति से
महाशिवरात्रि पर 12 शुभ योग
महाशिवरात्रि पर प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। 

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डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय
ज्योतिषाचार्य
थम्हनपुरा, बलिया (उ.प्र.)

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