नो-मैपिंग की धीमी प्रगति पर बलिया डीएम नाराज, अधिकारियों को सख्त चेतावनी

नो-मैपिंग की धीमी प्रगति पर बलिया डीएम नाराज, अधिकारियों को सख्त चेतावनी

बलिया : अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत नो-मैपिंग मामलों में नोटिस सुनवाई की प्रगति की समीक्षा हेतु जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में 07 फरवरी को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जनपद बलिया के विधानसभा क्षेत्र 357- बेल्थरारोड (अ.जा.) एवं 363-बैरिया में नो-मैपिंग मामलों के सापेक्ष नोटिस सुनवाई की बेहद कम प्रगति पर नाराज़गी व्यक्त की गई थी। ईआरओ नेट से 08 फरवरी को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जनपद में कुल 1,42,121 नो-मैपिंग मतदाताओं के सापेक्ष अब तक केवल 39,991 मामलों में ही सुनवाई हो सकी है, जो कुल मिलाकर मात्र 28.14 प्रतिशत है।

समीक्षा के दौरान सबसे कम प्रगति वाले विधानसभा क्षेत्र 357- बेल्थरारोड (18.49 प्रतिशत) एवं 363- बैरिया (17.69 प्रतिशत) की विशेष रूप से समीक्षा की गई। इसके पश्चात रसड़ा, सिकन्दरपुर, फेफना, बलिया नगर एवं बांसडीह विधानसभा क्षेत्रों की क्रमशः समीक्षा की गई। जिन सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा एक भी नोटिस की सुनवाई नहीं की गई या अत्यंत कम प्रगति पाई गई, उनसे स्पष्टीकरण तलब किया गया। अधिकारियों द्वारा सुनवाई किए जाने के बावजूद अपलोड न होने की बात कहे जाने पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराज़गी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए।

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समीक्षा में यह भी सामने आया कि मतदाताओं में जागरूकता की कमी, अपर्याप्त प्रचार-प्रसार तथा सुनवाई स्थलों की अधिक दूरी के कारण अपेक्षित संख्या में मतदाता उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारियों तथा शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को ई-रिक्शा पर लाउडस्पीकर के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। साथ ही सुनवाई स्थलों पर कुर्सी, पेयजल एवं स्वच्छता की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए कि अधिक मतदेय स्थलों वाले मतदान केंद्रों या 4 से 10 बूथों का क्लस्टर बनाकर नजदीकी स्थानों पर सुनवाई आयोजित की जाए।

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साथ ही आयोग द्वारा निर्धारित साक्ष्यों की सूची सुनवाई स्थलों पर चस्पा करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अवकाश के दिनों में भी नोटिस की सुनवाई की जा सकती है। जिन अधिकारियों की प्रगति 50 प्रतिशत से कम है, उन्हें अगले दो दिनों में 50 प्रतिशत तक प्रगति सुनिश्चित करने तथा जिनकी प्रगति 50 प्रतिशत से अधिक है, उन्हें 80 प्रतिशत से ऊपर ले जाने के निर्देश दिए गए। बैठक में फार्म-7 को बल्क में न लिए जाने संबंधी आयोग के निर्देशों से भी अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि आयोग की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अपात्र मतदाता निर्वाचक नामावली में शामिल न रहे। निर्वाचक नामावली को शुद्ध, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाने के निर्देशों के साथ बैठक संपन्न हुई। बैठक में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) एवं अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी उपस्थित रहे।

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