Ravi Raj Success Story : आंखों में नहीं थी रोशनी, दृष्टिबाधित बेटे ने UPSC में 20वीं रैंक लाकर दिया मेहनत का फल

Ravi Raj Success Story : आंखों में नहीं थी रोशनी, दृष्टिबाधित बेटे ने UPSC में 20वीं रैंक लाकर दिया मेहनत का फल

UPSC का सफर कभी भी आसान नहीं होता। अच्छे-अच्छे मेधावी छात्र भी इस परीक्षा की गहराई नापते-नापते थक जाते हैं। रवि के लिए भी यह सफर आसान नहीं था। यह उनका यूपीएससी में पांचवां प्रयास था। जरा सोचिए, लगातार चार बार खुद को तैयार करना, परीक्षा देना, अपनी शारीरिक चुनौतियों का सामना करना और फिर से नई ऊर्जा के साथ उठ खड़े होना, यह अपने आप में एक बहुत बड़ी तपस्या है। रविराज की कामयाबी यह दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और निरंतर मेहनत के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। दृष्टिबाधित होते हुए भी उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 20वीं रैक हासिल की है। आइए जानें उनकी सफलता के प्रेरणादायक सफर के बारे में...

Ravi Raj UPSC Success Story : हमारी जिंदगी में अक्सर छोटी-छोटी परेशानियां आती हैं और हम हार मानकर बैठ जाते हैं। लेकिन जरा सोचिए उस शख्स के बारे में जिसकी आंखों में दुनिया देखने की रोशनी तो नहीं थी, लेकिन उसके 'विजन' (दृष्टिकोण) में इतनी चमक थी कि उसने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया। हम बात कर रहे हैं बिहार के नवादा जिले के रहने वाले दृष्टिबाधित (Visually Impaired) रवि राज की। रवि राज ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल कर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जो न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं और खासकर दिव्यांगों के लिए बड़ी मिसाल बन गया है। रविरज ने साबित कर दिया है कि हौसलों में जान हो, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।

मूल रूप से नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव महुली के रहने वाले रवि राज की इस शानदार कामयाबी के पीछे उनके परिवार का बहुत बड़ा संघर्ष और त्याग छिपा है। रवि के पिता रंजन कुमार सिन्हा खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनकी मां विभा सिन्हा कुशल गृहिणी हैं। भले ही रवि के पिता एक साधारण किसान हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों के बीच कभी पैसों या गांव की दूरियों को आड़े नहीं आने दिया। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए यह परिवार फिलहाल नवादा शहर के नवीन नगर मोहल्ले में एक किराए के मकान में रहता है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद रवि ने जब आईएएस (IAS) बनने का एक बड़ा सपना देखा, तो उनके माता-पिता ने उन्हें कमजोर महसूस कराने के बजाय उनके कंधों को और मजबूत किया। परिवार के इसी अटूट विश्वास और सपोर्ट ने रवि को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी।

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अपनी जिद और मेहनत के दम पर उन्होंने सामान्य वर्ग (General Category) में 20वीं रैंक हासिल कर अपनी जगह पक्की की है। ऐसा नहीं है कि रवि को सफलता पहली बार मिली है। इससे ठीक पहले 2024 की यूपीएससी परीक्षा में भी उन्होंने अपना परचम लहराया था और 182वीं रैंक हासिल की थी। रवि राज की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सफलता की सीढ़ियां लगातार चढ़ते रहे हैं। अपनी पिछली यूपीएससी सफलता 182वीं रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ था। वह 9 दिसंबर से महाराष्ट्र के नागपुर में आईआरएस अधिकारी के तौर पर अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसके अलावा, यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 69वीं परीक्षा भी पास की थी, जिसमें उनका चयन राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर हुआ था। लेकिन रवि को तो आसमान छूना था, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। नागपुर में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपनी मंजिल को पा ही लिया।

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आंखों से देख नहीं सकते रवि राज
रवि राज दृष्टिबाधित हैं और उन्होंने नवादा जिले में ही रहकर पढ़ाई की है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा दयाल पब्लिक स्कूल से हुई और पार नवादा स्थित सत्येन्द्र नारायण सिंह इंटर स्कूल से 12वीं उत्तीर्ण किया है। सीता राम साहू कालेज से स्नातक की पढ़ाई की। फिर बिहार लोक सेवा आयोग की 69वीं सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करके राजस्व अधिकारी बने थे। बता दें कि उनकी माता विभा सिन्हा अपने पुत्र रवि राज की आंख बनी और इनकी सभी परीक्षाओं में इनका साथ निभाया। रवि राज ने अपनी सफलता से नवादा जिले का मान बढ़ाया है।

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