10 मार्च को 8200 करोड़ की रेल परियोजनाओं का सौगात यूपी को देंगे पीएम मोदी, बलिया-गाजीपुर की परियोजनाएं भी शामिल

10 मार्च को 8200 करोड़ की रेल परियोजनाओं का सौगात यूपी को देंगे पीएम मोदी, बलिया-गाजीपुर की परियोजनाएं भी शामिल

वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश में लगभग 8200 करोड़ रुपये की अनेक रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास मार्च को आजमगढ़ के मन्दूरी एयरपोर्ट में आयोजित समारोह से करेंगे। इससे उत्तर प्रदेश में भारतीय रेल की आधारभूत संरचना मजबूत होगी। इसकी जानकारी जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी अशोक कुमार ने दी। बताया कि, प्रधानमंत्री फरिहा-आजमगढ़-सठियांव रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइन के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण, इन्दारा-फेफना रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइन के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण, बनारस-झूँसी रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइन के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण एवं बलिया-बकुल्हाँ रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइन के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण करेंगे।

प्रधानमंत्री गंगा नदी पर नवनिर्मित रेल सह सड़क पुल सहित ग़ाज़ीपुर सिटी और ग़ाज़ीपुर घाट से ताड़ीघाट तक नई बड़ी रेल लाइन का भी उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वे गाजीपुर सिटी-ताड़ीघाट-दिलदारनगर जंक्शन के बीच एमईएमयू ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुभारम्भ करेंगे। भटनी-पिवकोल बाइपास लाइन भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे भटनी में इंजन को पलटकर डिब्बों में उसे दूसरी तरफ से जोड़ने की समस्या खत्म हो जाएगी तथा ट्रेनों का निर्बाध संचालन हो सकेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री बहराइच-नानपारा-नेपालगंज रोड नामक रेल खंड के आमान परिवर्तन का शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र ब्रॉड गेज लाइन के माध्यम से महानगरों से जुड़ जाएगा, जिससे तेजी से विकास हो सकेगा। 

इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री रोज़ा-सीतापुर कैंट-बुढवल रेल खण्ड का विद्युतीकृत लाइन के साथ दोहरीकरण का लोकार्पण, भांडई-इटावा रेल खण्ड के विद्युतीकरण, बरहन-एटा रेल खण्ड के विद्युतीकरण, शिकोहाबाद-मैनपुरी और इटावा मैनपुरी-फर्रुखाबाद रेल खण्ड के विद्युतीकरण का लोकार्पण भी करेंगे।

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बनारस-झूसी खंड का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का लोकार्पण
वाराणसी नगर, शैक्षिक, आध्यात्मिक, सांस्कृ तिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है। इसे घाटों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ के प्रमुख घाटों में अस्सी घाट, तुलसी घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, पंचगंगा घाट एवं नमो घाट आदि सम्मिलित हैं। यहाँ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में देश भर से श्रद्धालुओं का आवागमन वर्ष पर्यन्त होता है। अन्नपूर्णा मंदिर, संकटमोचन मंदिर, भैरोनाथ मंदिर, बड़ा गणेश मंदिर, तुलसी मानस मंदिर तथा दुर्गा मंदिर में प्रतिवर्ष बहुत बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन सायं आयोजित 'गंगा आरती श्रद्धालुओं एवं देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। अन्य दर्शनीय स्थलों में विजयानगरम् महल, रामनगर किला तथा पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तथा भारत माता मन्दिर प्रमुख हैं। यह नगर बौद्ध एवं जैन धर्म की दृष्टि से भी पवित्र माना जाता है। बनारस लोकोमोटिव वर्क्स में विद्युत इंजन का निर्माण होता है। बनारस स्टेशन को अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत रु 53 करोड़ रूपये की लागत से पुनर्विकसित किया जा रहा है, इसका शिलान्यास 06 अगस्त, 2023 को प्रधानमंत्री जी ने किया था, इसके अंतर्गत प्रथम प्रवेश द्वार को आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है तथा सर्कुलेटिंग एरिया में व्यापक सुधार के साथ उन्नत यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। बनारस-प्रयागराज रेल खंड पर बढ़ते हुये यातायात को देखते हुए रेल मंत्रालय द्वारा बनारस प्रयागराज खंड के दोहरीकरण को स्वीकृति प्रदान की गई।

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इस दोहरीकरण परियोजना के बनारस-झूसी (111.41 किमी.) का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण का कार्य रू 1600 करोड़ की लागत से पूर्ण किया गया है। यह विद्युतीकरण के साथ दोहरीकृत रेल लाइन वाराणसी, मिर्जापुर, संत रविदास नगर एवं प्रयागराज जनपद में स्थित है। इस परियोजना को 07 चरणों में पूर्ण किया गया। पहले चरण में बनारस हरदत्तपुर, दूसरे चरण में हरदत्तपुर-कछवा रोड, तीसरे चरण में कछवा रोड-माधो सिंह, चौथे चरण में माधो सिंह-ज्ञानपुर रोड, पाँचवें चरण में ज्ञानपुर रोड-हंडियाखास, छठें चरण में इंडियाखास-रामनाथपुर एवं सातवें चरण में रामनाथपुर-झूसी खंड का दोहरीकरण का कार्य पूरा किया गया। इस खंड पर बनारस, भूलनपुर, हरदत्तपुर, राजातालाब, बहेरवा, निगतपुर, कछवा रोड, कटका, माधो सिंह, अहिमनपुर, अलमऊ, ज्ञानपुर रोड, सराय जगदीश, जंगीगंज, अतरौरा, भीटी, हंडिया खास, सैदाबाद, रामनाथपुर एवं झूसी स्टेशन हैं।

इस परियोजना के पूरा होने से लाइन क्षमता में बढ़ोत्तरी होने से जन आकांक्षाओं के अनुरूप अतिरिक्त ट्रेनों का संचलन सम्भव हुआ है। प्रयागराज-नैनी-पं० दीन दयाल उपाध्याय जं. रेल मार्ग पर दबाव कम हुआ है। देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन इसी रेल मार्ग से होकर चलाई जाती है। विद्युतीकरण सहित इस दोहरी लाइन का निर्माण होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं तथा क्षेत्र तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। कल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के करकमलों द्वारा इस विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है।

भटनी-पिवकोल बाईपास लाइन का लोकार्पण

देवरिया जनपद में स्थित भटनी एक महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है, जहाँ छपरा, गोरखपुर एवं वाराणसी की ओर से आने वाली रेल लाइनें मिलती हैं। देवरिया को 'देवनगरी' या देवस्थान' भी कहा जाता है। देवरहा बाबा की जन्म भूमि देवरिया शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की समाधि के लिये भी विख्यात है। देश के स्वतंत्रता संग्राम में देवरिया का एक प्रमुख स्थान है। भटनी जं. स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत रु 42.62 करोड़ की लागत से पुनर्विकसित किया जा रहा है, इसका शिलान्यास 26 फरवरी, 2024 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया था। भटनी जं. स्टेशन पर 'एक स्टेशन एक उत्पाद' योजना के अंतर्गत सजावट के हस्तशिल्प एवं स्थानीय मिठाई (बर्फी) का स्टॉल लगाया गया है। परिचालनिक सुगमता हेतु काफी समय से देवरिया जनपद में भटनी-पिवकोल बाईपास लाइन निर्माण की आवश्यकता थी, जिसे ध्यान में रखकर रेल मंत्रालय द्वारा भटनी-पिवकोल बाईपास लाइन (07 किमी.) निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई तथा इस बाईपास लाइन का विद्युतीकरण सहित निर्माण को रू 67 करोड़ की लागत से पूर्ण किया गया। इस बाईपास लाइन निर्माण परियोजना के अंतर्गत 01 बड़े एवं 05 छोटे पुलों सहित 03 रोड अंडर ब्रिज (आर.यू.बी.) का निर्माण किया गया है। भटनी-पिवकोल नई बाईपास लाइन के निर्माण से भटनी जं पर वाराणसी की ओर से आने वाली ट्रेनों को छपरा एवं सीवान जाने तथा छपरा की ओर से आने वाली ट्रेनों को वाराणसी जाने के लिये इंजन रिवर्सल की समस्या समाप्त हो गई है, बाईपास के माध्यम से बिना इंजन की दिशा बदले ट्रेनों का सुगम परिचालन हो रहा है। इस बाईपास लाइन के निर्माण के कारण लाइन क्षमता में वृद्धि हुई है तथा अधिक ट्रेनों का संचलन सम्भव हो सका है। भटनी-पिवकोल नई बाईपास लाइन के खुल जाने से जहाँ संसाधनों की बचत हो रही है वहीं ट्रेनों के यात्रा समय में भी कमी आई है। कल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा इस बाईपास लाइन को राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है।

बलिया-बकुल्हा खंड का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का लोकार्पण

ऋषियों, मुनियों की तपोभूमि एवं महर्षि भृगु की पवित्र साधना स्थली बलिया का वर्ष 1857 से 1942 तक स्वतंत्रता संग्राम की लम्बी ऐतिहासिक यात्रा में अनोखा योगदान रहा है। वर्ष 1942 की जनक्रांति में बलिया के श्री चित्तू पांडेय ने जनपद की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। स्वतंत्रता सेनानी मुरली मनोहर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, देश के नौवें प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर बलिया के ही सपूत हैं। मनीषियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों की कर्मभूमि में बलिया-बकुल्हा मीटर गेज खंड का निर्माण वर्ष 1899 में पूर्ण हुआ था और भारतीय रेल की एक गेज की नीति के अंतर्गत इस खंड का आमान परिवर्तन वर्ष 1996 में पूरा हुआ। इस खंड पर बढ़ते रेल यातायात को देखते हुये रेल मंत्रालय द्वारा छपरा-बलिया खंड के दोहरीकरण का निर्णय लिया गया। बलिया-छपरा दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत बलिया बकुल्हा (43.42 किमी.) खंड का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण का कार्य रू 637 करोड़ की लागत से पूर्ण कर लिया गया है। इस खंड पर बलिया, बाँसडीह रोड, छाता आसचौरा, सहतवार, रेवती, दल छपरा, सुरेमनपुर एवं बकुल्हा स्टेशन स्थित हैं।

बलिया-बकुल्हा खंड का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण का कार्य पूरा होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने से भारतीय रेल जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस खंड का दोहरीकरण हो जाने से रेलवे की लाइन क्षमता में सुधार हुआ है तथा जन आकांक्षाओं के अनुरूप इस खंड से होकर अधिक ट्रेनों का संचलन सम्भव हुआ है। कल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा इस दोहरीकृत रेल खंड को राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है।

गंगा नदी पर रेल पुल सहित गाजीपुर सिटी एवं गाजीपुर घाट से ताड़ीघाट नई बड़ी लाइन का उद्घाटन

गाजीपुर, पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जनपद है। गंगा नदी के तट पर बसे इस जनपद को लहुरी काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह नगर 'गुलाब जल' के लिये भी विख्यात है। गाजीपुर में रेल कर्मियों के प्रशिक्षण हेतु क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान स्थित है। यहाँ पर विगत वर्ष निर्मित पेरिशेबल कार्गो केन्द्र किसानों में लोकप्रिय है, इसका उद्घाटनमाननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया था। गाजीपुर सिटी स्टेशन ब्रॉड गेज के माध्यम से देश के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है। गाजीपुर को उपनगर दिलदारनगर से जोड़ने के लिये क्षेत्रीय जनता की काफी समय से माँग रही है, जिसे ध्यान में रखकर रेल मंत्रालय द्वारा गाजीपुर-तारीघाट नई लाइन निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई तथा इस परियोजना का शिलान्यास माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया था। परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर रेल पुल सहित गाजीपुर सिटी एवं गाजीपुर घाट से ताड़ीघाट (16.79 किमी.) नई रेल लाइन का निर्माण रु 1650 करोड़ की लागत से पूर्ण किया गया। यह नई रेल लाइन गाजीपुर जनपद में है। इस नई रेल लाइन निर्माण के अंतर्गत गंगा नदी पर रेल पुलएवं 12 छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। नई रेल लाइन के निर्माण के साथ ही इसका विद्युतीकरण भी किया गया है। विद्युतीकरण सहित गाजीपुर सिटी एवं गाजीपुर घाट से ताड़ीघाट नई रेल लाइन का निर्माण होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

गाजीपुर सिटी स्टेशन से दिलदार नगर जं. स्टेशन की दूरी वाया वाराणसी 146 किमी. है, जो इस नई रेल लाइन के बन जाने से घटकर 29 किमी. हो गई है। इसी प्रकार, गाजीपुर सिटी स्टेशन से पटना की दूरी भी 24 किमी. कम हो गई है। इस रेलवे लाइन के बनने से भौतिक दूरी कम होने के साथ-साथ ट्रेनों के संचलन समय में उल्लेखनीय बचत होगी तथा छपरा एवं औड़िहार से आने वाली ट्रेनों को डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर पर जाने के लिये कनेक्टिविटी मिलेगी। ट्रेनों के सुगम एवं निर्बाध संचलन को ध्यान में रखते हुये, यहाँ वाई (Y)- कनेक्शन बनाया गया है, जिससे इंजन रिवर्सल की आवश्यकता नहीं होगी। छपरा से आने वाली ट्रेनें गाजीपुर घाट से सीधे तारीघाट को चली जायेंगी। इसी प्रकार वाराणसी एवं जौनपुरसे आने वाली ट्रेनें गाजीपुर सिटी से सीधे तारीघाट को जा सकेंगी। इसके साथ ही गोरखपुर, वाराणसी सहित उत्तर भारत के नगरों से पटना, कोलकाता सहित पूर्वी भारत के नगरों में जाने के लिये एक वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध हो गया है। गाजीपुर-तारीघाट के मध्य रेल लिंक स्थापित होने से क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास को गति मिलेगी। कल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के करकमलों द्वारा इस नई रेल लाइन निर्माण परियोजना का उद्घाटन किया जा रहा है।

इन्दारा-फेफना खंड का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का लोकार्पण

इन्दारा-फेफना मीटर गेज खंड का निर्माण वर्ष 1899 में हुआ। भारत सरकार की एक गेज की नीति के अंतर्गत वर्ष 1999 में आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत इन्दारा-फेफना खंड को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया। क्षेत्र में बढ़ते रेल यातायात के दबाव को देखते हुये रेल मंत्रालय द्वारा इन्दारा-फेफना (50.84 किमी. ) खंड के दोहरीकरण कार्य को विद्युतीकरण के साथ स्वीकृति प्रदान की गई। इन्दारा-फेफना खंड के दोहरीकरण के प्रथम चरण में बलिया जनपद के फेफना-रसड़ा (22.41 किमी.) खंड तथा द्वितीय चरण में रसड़ा इन्दारा (28.43 किमी.) खंड का दोहरीकरण (विद्युतीकरण सहित) का कार्य पूर्ण किया गया । इन्दारा-फेफना खंड के दोहरीकरण का कार्य विद्युतीकरण सहित रु 600 करोड़ की लागत से पूर्ण किया गया। यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया एवं मऊ जनपद में स्थित है। इस खंड पर इन्दारा, हलधरपुर, रतनपुरा, रजमलपुर रोड, रसड़ा, सनवारा, चिलकहर, जिगनी खास, फेफना स्टेशन स्थित हैं। इस परियोजना के अंतर्गत 01 बड़े एवं 27 छोटे पुलों का कार्य किया गया। इन्दारा रेलवे स्टेशन एक महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है, जो कि भटनी-औंड़िहार रेल खंड पर स्थित है, यहाँ से एक रेलवे लाइन दोहरीघाट को जोड़ती है। ट्रेन परिचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण यह रेल खंड भटनी-औड़िहार रेल मार्ग को छपरा-औड़िहार रेल मार्ग से जोड़ता है, जिसके फलस्वरूप ट्रेनों के सुगम संचालन हेतु एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध रहता है। इसके दोहरीकरण से लाइन क्षमता का विस्तार हुआ है तथा विद्युतीकरण के फलस्वरूप पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने से भारतीय रेल जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। कल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा इस दोहरीकृत एवं विद्युतीकृत रेल खंड को राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है।

फरिहा-आजमगढ़-सठियाँव खंड का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का लोकार्पण

तमसा नदी के तट पर स्थित आजमगढ़ उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला एवं मंडल मुख्यालय है। यह जिला उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण है। पर्यटन की दृष्टि से महाराजगंज, दुर्वासा, मुबारकपुर, मेहनगर, भंवरनाथ मंदिर एवं अवन्तिकापुरी आदि विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। यह जनपद आदि काल से ही मनीषियों, ऋषियों, चिन्तकों, विद्वानों और स्वतंत्रता सेनानियों की जन्म स्थली रही है। आजमगढ़ शहर अपनी साहित्य, संस्कृति, शिक्षा के लिये आरम्भ से ही प्रसिद्ध रहा है। आजमगढ़ को यह गौरव प्राप्त है कि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' राहुल सांकृत्यायन, गौलाना शिबली नोमानी, कैफी आजमी तथा श्यामनारायण पाण्डेय जैसे महान साहित्यकारों का सम्बन्ध आजमगढ़ से रहा है।

आजमगढ़ जनपद में स्थित मुबारकपुर बनारसी साड़ियों के लिये काफी प्रसिद्ध है तथा यहीं से इनका निर्यात देश के विभिन्न नगरों के साथ ही अन्य देशों में होता है। आजमगढ़ स्टेशन पर 'एक स्टेशन एक उत्पाद' योजना के अंतर्गत यहाँ की मशहूर ब्लैक पॉटरी एवं हस्तशिल्प टेराकोटा के उत्पादों का स्टॉल लगाया गया है। 126 वर्ष पूर्व आजमगढ़ रेल मार्ग से जुडा, जब फरिहा-आजमगढ़-सठियाँव मीटर गेज खंड का निर्माण दो चरणों में पूर्ण हुआ।

प्रथम चरण में सठियाँव से आजमगढ़ तक वर्ष 1898 एवं द्वितीय चरण में आजमगढ़ से फरिहा तक वर्ष 1903 में मीटर गेज लाइन का निर्माण हुआ। भारत सरकार की एक गेज की नीति के अंतर्गत वर्ष 1999 में मऊ-शाहगंज आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत फरिहा-आजमगढ़-सठियाँव खंड को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया। क्षेत्र में बढ़ते रेल यातायात के दबाव को देखते हुये रेल मंत्रालय द्वारा मऊ-शाहगंज खंड के दोहरीकरण कार्य को विद्युतीकरण के साथ स्वीकृति प्रदान की गई। मऊ-शाहगंज खंड के दोहरीकरण के प्रथम चरण में पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में स्थित फरिहा-आजमगढ़-सठियाँव खंड (29.82 किमी.) का दोहरीकरण का कार्य विद्युतीकरण के साथ रु 360 करोड़ की लागत से पूर्ण किया गया। इस खंड पर फरिहा, सरायरानी, आजमगढ़, सिधारी, सठियाँव स्टेशन स्थित है। इस परियोजना के अंतर्गत 29 छोटे पुलों का कार्य किया गया। फरिहा-आजमगढ़-सठियाँव खंड का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण का कार्य पूरा होने से लाइन क्षमता में सुधार के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने से भारतीय रेल जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। मऊ-शाहगंज विद्युतीकृत खंड पर स्थितआजमगढ़ स्टेशन जिला मुख्यालय का स्टेशन है।

यह स्टेशन सीधी ट्रेन सुविधा से दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, वाराणसी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर आसनसोल, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, अमृतसर, अजमेर, सूरत, अहमदाबाद आदि नगरों से जुड़ा है। वर्तमान में इस स्टेशन पर प्रतिदिन लगभग 2,200 यात्रियों का आवागमन होता है। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 15 जोड़ी ट्रेनों का संचलन होता है। एन.एस.जी-3 श्रेणी के इस स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज (एफ.ओ. बी.) पूछताछ कार्यालय, जनसम्बोधन प्रणाली, 08 टिकट खिडकी, कोच इंडीकेशन बोर्ड, साइनेज, प्रसाधन, सी.सी.टी.वी. कैमरा, वेटिंग हॉल, पुरुष एवं महिलाओं के लिये अलग-अलग वेटिंग रूम, रिटायरिंग रूम, डॉरमेट्री एवं उच्च श्रेणी वेटिंग रूम उपलब्ध हैं। सर्कुलेटिंग एरिया में बेहतर प्रकाश के लिये हाई मास्ट टावर लगाया गया है। यहाँ पर कुल 03 प्लेटफॉर्म हैं, जिन पर 2,420 वर्गमीटर में यात्री छाजन, पीने के पानी हेतु 102 नल तथा 566 यात्रियों को बैठने के लिये सीट, 21 पंखे 91 लाइट की सुविधा उपलब्ध है। आजमगढ़ रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत रू 34 करोड़ की लागत से पुनर्विकसित किया जा रहा है, इसका शिलान्यास 06 अगस्त, 2023 को माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गया था, इसके अंतर्गत आजमगढ़ स्टेशन पर स्टेशन भवन को आकर्षक स्वरूप देने के साथ ही आधुनिक सुख-सुविधाओं का विकास एवं विस्तार किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत स्टेशन के एप्रोच रोड का चौड़ीकरण, सर्कुलेटिंग एरिया में ड्रेनेज सिस्टम में सुधार, प्लेटफॉर्म पर यात्री छाजन एवं ग्रेनाइट स्टोन का प्रावधान सम्मिलित है। डीलक्स प्रसाधन, वेटिंग हॉल, बुकिंग कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिये यहाँ फूड प्लाजा तथा प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज (एफ.ओ.बी.). 01 लिपट एवं 04 एस्केलेटर का प्रावधान के साथ उन्नत यात्रा सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। 

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