बलिया में ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत, अपूर्वा नर्सिंग होम पर हंगामा ; चिकित्सक दम्पती समेत 5 डाक्टरों पर मुकदमा

बलिया में ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत, अपूर्वा नर्सिंग होम पर हंगामा ; चिकित्सक दम्पती समेत 5 डाक्टरों पर मुकदमा

बलिया : शहर के जगदीशपुर स्थित अपूर्वा हास्पिटल में पथरी के आपरेशन के दौरान रविवार की शाम 24 वर्षीय महिला की मौत के बाद हड़कंप मच गया। परिजनों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने पांच डाक्टरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अस्पताल की ओटी को सील कर दिया हैं। हालांकि, देर शाम तक पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया था।

सुखपुरा क्षेत्र के देवकली निवासी सुप्रिया राय उर्फ अनीषा पत्नी चंचल राय रविवार की दोपहर करीब दो बजे इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि अस्पताल में आपरेशन के लिए परिजनों से 50 हजार रुपये जमा कराए गए तथा 50 हजार और जमा करने के लिए कहा गया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डाक्टरों ने लेजर तकनीक की बजाय ओपन सर्जरी कर दी। कुछ समय बाद डा. ज्योत्स्ना सिंह ओटी से बाहर आईं और परिजनों को महिला की हालत गंभीर बताते हुए उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लखनऊ अस्पताल ले जाने को कहा। इस पर परिजन अंदर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि महिला की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर व सीओ सिटी ने स्वजन को कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन वह तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर डटे रहे।
अस्पताल परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 
वहीं, शिवान्शु ने तहरीर देकर आरोप लगाया है कि डा. ज्योत्स्ना सिंह, डा.अपूर्वा सिंह, डा. दीपक सिंह, डा.संजय सिंह व डा. रोहन गुप्ता ने आपरेशन किया। डाक्टरों ने सच्चाई छिपाने की कोशिश करते हुए गलत जानकारी दी। आरोप है कि लापरवाही और धोखे से किए गए आपरेशन के कारण ही अनिशा की मौत हो गई। अनिशा ने छः माह पूर्व ही सीजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया था। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों की तहरीर के आधार पर पांच डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है, हालांकि अन्य मरीजों के भर्ती होने के कारण पूरे नर्सिंग होम को सील नहीं किया गया।

गिरफ्तारी में देर पर उठ रहे सवाल

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मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद किसी भी आरोपी डाक्टर की गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई में देरी हो रही है। एक सप्ताह पूर्व ही शहर में ही एक अन्य निजी अस्पताल में एक महिला व उसके नवजात शिशु की आपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। जनपद में लगातार हो रही ऐसी घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बलिया जनपद का स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक होकर देख रहा है।

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रोहित सिंह मिथिलेश

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