चरित्र निर्माण में संस्कृत की विशेष भूमिका :  डॉ. नरेन्द्र पाण्डेय

चरित्र निर्माण में संस्कृत की विशेष भूमिका :  डॉ. नरेन्द्र पाण्डेय

वीवो फोन और एक्सिस बैंक के एटीएम में भी संस्कृत भाषा का हो रहा है उपयोग

हमारे देश का सम्मान ज्ञान के कारण होता है, हमें ज्ञान को अनवरत बढाना चाहिये

बलिया : उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा लगातार निःशुल्क आनलाइन संस्कृत भाषा शिक्षण का कार्यक्रम विभिन्न जनपदों में संचालित किया जा रहा है, जिसमें प्रातः 8 बजे से रात्रि 9 बजे तक संस्कृत प्रशिक्षक संस्कृत सम्भाषण सिखा रहे है। समय समय पर कक्षा में विशिष्ट विद्वानों के प्रेरणा सत्र भी आयोजित किये जा रहें हैं। इसी क्रम में रात्रि 8 बजे से 9 बजे की कक्षा में प्रशिक्षक अंशु गुप्ता, अजय कुमार, सुधीर पाण्डेय, गणेशदत्त द्विवेदी, लल्लन बाबू मौर्य, निधि पाण्डेय ने गूगल मीट के माध्यम से सामूहिक प्रेरणा सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में लभभग सौ लोग उपस्थित रहें।

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कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप संस्कृतभारती के पूर्व संगठन मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. नरेन्द्र पाण्डेय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र की प्रेरणा एवं निदेशक विनय कुमार श्रीवास्तव के सान्निध्य से हुआ। छात्रा शान्ती बेहरा ने सरस्वती वन्दना एवं और विवेक कुमार द्वारा मंगलाचरण का पाठ कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।

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चरित्र निर्माण में संस्कृत भाषा की विशेष भूमिका

मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र पाण्डेय ने संस्कृत की महत्ता को बताते हुए कहा कि चरित्र निर्माण में संस्कृत भाषा विशेष भूमिका निभाती है। केवल एक शास्त्र ही नहीं, बल्कि सभी शास्त्रों का समावेश संस्कृत में ही है। भारतीय ज्ञान परम्परा और जीवन में आचरण करने के लिये संस्कृत आवश्यक है। कहा कि हमारे जीवन के लिये तर्कशास्त्र, धर्मशास्त्र और योगशास्त्र आवश्यक है। उसी के अनुसार जीवन का संचालय सम्भव है, जिसके लिये संस्कृत आवश्यक है। उन्होंने सरकार की इस योजना की सराहना करते हुए मुख्यमन्त्री और पूर्व अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र को धन्यवाद ज्ञापित किया। कहा कि संस्कृत के लिये शुरू किया गया यह प्रकल्प प्रदेश में संस्कृत, संस्कृति और संस्कारों की क्रान्ति लायेगा।

प्रशिक्षक अजय कुमार ने अतिथियों का परिचय एवं प्रास्ताविक बताते हुये संस्थान की समस्त योजनाओं के बारे में विस्तृत चर्चा किया। लोगों से उसका लाभ लेने का आग्रह किया। कार्यक्रम में शशिबाला, सुरभि पाण्डेय, ऋषिकेश और अंशिका तिवारी ने अनुभव कथन और गीत गाकर कार्यक्रम को रोचक बनाया। संचालन प्रशिक्षक गणेश दत्त द्विवेदी तथा सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रशिक्षक लल्लन बाबू मौर्या ने किया। कार्यक्रम में प्रशिक्षण समन्वयक धीरज मैठाणी, दिव्यरंजन एवं राधा शर्मा उपस्थित रहीं।

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