'आंखों में चिल्लायी थी वो' और 'हुले लेले करत रह' के बाद शशि प्रेमदेव की कलम बोली - 'कितना कुछ करना था मुझको... ' 

'आंखों में चिल्लायी थी वो' और 'हुले लेले करत रह' के बाद शशि प्रेमदेव की कलम बोली - 'कितना कुछ करना था मुझको... ' 

बलिया : बलिया शहर में स्थित कुंवर सिंह इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य पद को सुशोभित कर रहे शशिकुमार सिंह 'शशि प्रेमदेव' के तीसरे काव्य संग्रह 'कितना कुछ करना था मुझको...' का शानदार विमोचन मंगलवार को उसी विद्यालय के सभागार संपन्न हुआ, जिसकी याद उपस्थित जनों को बहुत दिनों तक सुखद एहसास कराती रहेगी। इससे पहले आपके दो काव्य संग्रह 'आंखों में चिल्लायी थी वो' एवं 'हुले लेले करत रह' आ चुके हैं।
 
Shashi Kumar Singh Premdev
 
विमोचन समारोह को सम्बोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि जननायक चन्दशेखर विश्वविद्यालय के लोकपाल डॉ. गणेश कुमार पाठक ने कहा कि, 'अपने आस पास की दुनिया को बेहतर बनाने में योगदान न दे पाने और अपनी ईश्वर प्रदत्त प्रतिभा का लोकहित में मनचाहे ढंग से खपाने में चूक जाने की कसक 'कितना कुछ करना था मुझको... ' की अधिकांश कविताओं में साफ झलकता है। जनपद के सुपरिचित कवि शशि कुमार सिंह 'शशि प्रेमदेव' की उक्त पुस्तक को लेकर डॉ. पाठक का संबोधन प्रेरणा जगाने वाला रहा। विशिष्ट अतिथि युवा डॉ. कृष्णा शंकर सिंह ने शशि प्रेमदेव को सहज ही सम्मोहित करने वाला रचनाकार बताया।
 
लोकार्पित पुस्तक पर समीक्षात्मक व्याख्यान देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. यशवन्त कुमार सिंह ने कहा कि प्रेमदेव कबीर और दुष्यन्त की निर्भीकता के साथ मानव समाज में व्याप्त कुरूपता पर कलम चलाने वाले ऐसे कवि लगते हैं, जो कुंठा और पाखंड से मुक्त होने का आह्वान करता है  ताकि जीवन का सुन्दरतम् पक्ष सामने आ सकें। 'कितना कुछ करना था मुझको... ' पर वरिष्ठ साहित्यकार डाक्टर जनार्दन राय (Dr. Janardan Rai) का विद्वत्तापूर्ण संबोधन सभी को भीतर तक झकझोर गया। 
 
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक- शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों के अलावा वरिष्ठ पत्रकार अशोक, कवि शिव जी पाण्डेय रसराज, हीरालाल हीरा, विंध्याचल सिंह, रामेश्वर सिंह, मुकेश चंचल, पूर्व प्रधानाचार्य अशोक श्रीवास्तव, कामेश्वर नाथ श्रीवास्तव, अजय बहादुर सिंह, डॉ. विश्वरंजन सिंह, श्रीमती उमा सिंह, अनिरुद्ध सिंह, बालेश्वर नाथ सिंह, मानवेन्द्र विक्रम सिंह, आनंद विक्रम सिंह, शिवकुमार कौशिकेय, मोहन जी श्रीवास्तव, रणजीत साहनी, राजेश कुमार सिंह, डॉ. संगीता चौबे आदि साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। वाणी वंदना प्रवक्ता डॉ. राम मिलन विश्वकर्मा ने तथा संचालन हिन्दी प्रवक्ता विजेंद्र प्रताप सिंह ने किया। अध्यक्षता उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष विष्णुदेव राय तथा आभार प्रदर्शन प्रेम शंकर राय ने किया।

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