बलिया : सिर्फ इशारों से अपना दर्द बयां कर रही यह महिला, नहीं समझ रहा कोई

बलिया : सिर्फ इशारों से अपना दर्द बयां कर रही यह महिला, नहीं समझ रहा कोई


मनियर, बलिया। 'खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते- पाते... और लोग पूछ रहे हैं कोई तकलीफ तो नहीं।' यह पंक्ति मनियर बस स्टैंड के नजदीक अपनों से भटकी मूक-बधिर महिला पर सटीक बैठ रही है। मुक-बधिर होने के कारण महिला कुछ बता नहीं रही है। सिर्फ इशारों से अपना दर्द बयां कर रही है, लेकिन उसे समझे तो कौन? वह हर आने जाने वाले लोगों के चेहरे पढ़ रही है, शायद कोई उसे पहचान ले। 



मनियर बस स्टैंड के पास  नावट नम्बर 2 में गोरख राम के घर गूंगी महिला करीब एक सप्ताह से रह रही है। उक्त महिला मूक बधिर है, जिसके वजह से वह कुछ बता नहीं पा रही है। सिर्फ इशारों से वह बता रही है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मूक बधिर महिला के तीन बच्चे हैं। एक की शादी हो चुकी है। वह महिला हाथ के इशारे से उन बच्चों की ऊंचाई बता रही है। इशारा कर रही है कि एक बच्ची की मांग टिकी है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि महिला  की एक बच्ची है, जो शादीशुदा है। महिला कहां की है? उसका नाम क्या है? पति का क्या नाम है? कैसे अपनों से बिछुड़ी? यह पता नहीं चल पा रहा है। शायद महिला पढ़ी-लिखी भी नहीं है, जो घर का पता बता लिखकर बता दें और उसे उसके घर पहुंचाया जा सके। महिला सांवली रंग की है। मुंह लंबा है और लंबाई करीब 5 फीट 4 इंच है।


वीरेन्द्र सिंह

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