फूल हूं...  तासीर मेरी तितलियों से पूछना

फूल हूं...  तासीर मेरी तितलियों से पूछना

ग़ज़ल

कब कहा मैंने किसी क़तरे से कुछ ज़्यादा हूँ मैं
हाँ,  मगर सूखे  हुए दरिया से तो अच्छा हूँ  मैं

शहर में आया हुआ  हूँ ... गाँव का बन्दा हूँ मैं
या कहूँ कि भीड़ में बिछडा हुआ बच्चा हूँ मैं

ख़ुश न हो इतना मुझे तू देखकर फुटपाथ पे
सेठ ! तेरे मालो-ज़र से आज भी महँगा हूँ मैं

है तज़र्बा रोज़ जीने और मरने का मुझे
रोज़ सूरज की तरह जलता हूँ मैं बुझता हूँ मैं

तू इसे मेरी अना समझे कि पागलपन कहे
दुश्मनी भी हैसियत वालों से ही करता हूँ  मैं

फूल हूँ...  तासीर मेरी तितलियों से पूछना
देवता को क्या पता खट्टा हूँ या मीठा हूँ मैं

हर किसी से इश्क़ करने का नतीज़ा ये हुआ
साथ अब कोई नहीं है... बे-तरह तन्हा हूँ मैं
                       
• क़तरा = बूँद 
• अना = स्वाभिमान 
• माल-ओ-ज़र = धन-दौलत

कॉपीराइट  --- शशि प्रेमदेव, बलिया

Related Posts

Post Comments

Comments

Latest News

बलिया में आग का तांडव : पांच झोपड़ियां राख, दो झुलसे बलिया में आग का तांडव : पांच झोपड़ियां राख, दो झुलसे
बलिया : बांसडीह तहसील क्षेत्र के अकोल्ही गांव में सोमवार की देर रात लगी आग से श्रीराम राजभर और हरेराम...
बलिया में इलेक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल 2026 के खिलाफ विद्युत कर्मचारियों का प्रदर्शन
उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बलिया प्रशासन अलर्ट, डीएम ने दिए कड़े निर्देश
बलिया में ईंट से मारकर किशोर की हत्या, बगीचे में मिला खून से लथपथ शव
बलिया में गर्भवती को निजी अस्पताल भेजने वाली आशा बहू के खिलाफ डीएम की बड़ी कार्रवाई
10 मार्च का राशिफल : कैसा रहेगा अपना मंगलवार, पढ़ें आज का राशिफल
Ballia News : मानदेय भुगतान को लेकर मनरेगा कर्मियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी