बसंत पंचमी : बागेश्वरी भगवती वाणी में ओज भर दो, शब्दों में शक्ति आए...

Dr Mithilesh Rai

बसंत पंचमी : बागेश्वरी भगवती वाणी में ओज भर दो, शब्दों में शक्ति आए...

Basant Panchami : बसंत पंचमी शांति, संस्कृति एवं शिक्षा का महापर्व है। यह प्रकृति के सौंदर्य, नई शुरुआत और सकारात्मकता का उत्सव भी है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा से मन में शांति और ज्ञान का संचार होता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में शिक्षा, कला, सौन्दर्य और प्रकृति का सम्मान करना कितना महत्वपूर्ण है। बसंत पंचमी मन की, जीवन की, संस्कृति की, साहित्य की, संगीत की, प्रकृति की असीम कामनाओं का अनूठा एवं सौन्दर्यमय त्योहार है, जो माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। दूसरे शब्दों में बसंत पंचमी का दूसरा नाम सरस्वती पूजा भी है। माता सरस्वती को ज्ञान-विज्ञान, सूर-संगीत, कला, सौन्दर्य और बुद्धि की देवी माना जाता है। प्रस्तुत है बलिया निवासी डॉ. मिथिलेश राय की मां सरस्वती से एक प्रार्थना...

पद्मासिनी भगवती सबका हृदय धवल हो
मां भारती तुम्हारे भारत की जय विजय हो।
हंसासिनी विवेकी अज्ञानता मिटा दो
निर्बाध ज्ञान गंगा इस देश में बहा दो।
पुस्तक प्रवीण माता बुद्धि विवेक बल दो
वेदों की ओर लौटें सामर्थ्यवान कर दो।
बागेश्वरी भगवती वाणी में ओज भर दो
शब्दों में शक्ति आए सुर साधना सफ़ल हो।
हे श्वेत वस्त्र धारणी धवला विशुद्धरूपा
मन में उजास भर दो उज्ज्वल भविष्य कर दो।
पद्मासिनी भगवती सबका हृदय धवल हो
मां भारती तुम्हारे भारत की जय विजय हो।

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