Ballia News : उपेक्षा का शिकार गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर बना अंत्येष्टि स्थल



मझौवां, बलिया : मानव जीवन का अंतिम पड़ाव धर्मानुसार उसका अन्तयेष्टि स्थल ही होता है, जहां से उसके अगले योनि में प्रवेश करने को गति मिलती है। मानव जीवन के इस आस्था और विश्वास का मर्म समझते हुए सन् 2015 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने हर पंचायत में अन्तयेष्टि स्थल बनवा दिया, लेकिन वर्तमान में अन्तेयष्टि स्थल रख-रखाव के अभाव में स्वयं अंतिम सांस ले रहे है।
क्षेत्र का सबसे व्यस्त गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर ग्राम पंचायत दीघार द्वारा निर्मित अन्तयेष्टि स्थल पर शायद ही कभी किसी मृतक का अंतिम संस्कार होता हो, वजह सुविधाओं का नगण्य होना है। दीघार ग्राम पंचायत में भारी-भरकम बजट से बना यह स्थल खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। मृतक के अंतिम संस्कार के लिए आये लोग इस स्थल से अधिक हुकुम छपरा गंगा घाट का प्रयोग करते है। बरसात के मौसम में कभी-कभी इस अन्तयेष्टि स्थल का प्रयोग हो जाता है।
उचित देखरेख के अभाव का आलम यह है कि यहां सफाई भी नहीं होती। अन्तयेष्टि स्थल पूर्णरूप से जंगल-झाड़ के कब्जे में है। पचरुखिया अन्तयेष्टि स्थल पर जल की व्यवस्था (नल) और रोशनी न होना भी एक वजह है। इस अन्तयेष्टि स्थल से सबसे बड़ी समस्या गंगा नदी का खड़ा अरार है, जिसकी वजह से नीचे उतरना नामुमकिन होता है। चिता की राख जलधारा में प्रवाहित करने का कोई ठोस इंतजाम भी नहीं है। अन्तयेष्टि स्थल का टीन शेड जगह-जगह से उजड़ने के बावजूद किसी का इस तरफ ध्यान न जाना, सोचनीय प्रश्न है।
हरेराम यादव

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