TET अनिवार्य : विभागीय आदेश से बढ़ी हलचल, सिर्फ इन शिक्षकों को मिलेगी TET से छूट



Maharashtra News : महाराष्ट्र के जनजातीय विकास विभाग ने आश्रम स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों से जुड़ा अहम सरकारी आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत उन शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है।
नए प्रावधान के अनुसार, ऐसे शिक्षकों को 1 सितंबर 2027 तक TET उत्तीर्ण करनी होगी। निर्धारित समय-सीमा में परीक्षा पास न करने की स्थिति में उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। यह आदेश राज्य में संचालित सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों पर लागू होगा, जिनकी संख्या लगभग 480 बताई जा रही है। वहीं, जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में पाँच वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें इस नियम से राहत दी गई है। बशर्ते वे किसी प्रकार के पदोन्नति (प्रमोशन) का दावा न कर रहे हों।
यह आदेश सितंबर 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जारी किया गया है, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य बताया गया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह शर्त केवल नए नहीं, बल्कि पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर भी पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी। महाराष्ट्र में किसी विभाग द्वारा अदालत के इस फैसले के बाद यह पहला स्पष्ट प्रशासनिक आदेश माना जा रहा है।
इस निर्णय के बाद शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल है। शिक्षकों का कहना है कि राज्य में TET वर्ष 2013 से पहले लागू नहीं थी, ऐसे में उससे पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए सीमित समय में परीक्षा पास करना कठिन होगा।
महाराष्ट्र स्कूल प्रिंसिपल्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के अनुसार, लंबे समय तक राज्य सरकार की ओर से कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया था। अब जनजातीय विकास विभाग के आदेश से यह संकेत मिल रहा है कि TET को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया जा सकता है, जिससे शिक्षकों में नौकरी को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

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