हरीश राणा इच्छामृत्यु के लिए दिल्ली एम्स शिफ्ट : 'जाओ हरीश, वक्त आ गया है', विदाई से पहले बहन ने दी जिंदगी का सबक ; रो पड़ा हर दिल



'सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ... ठीक है...' यह बातें ब्रह्मकुमारी लवली ने उस हरीश राणा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी है। ब्रह्मकुमारी और परिवार के लोगों ने गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर से हरीश को विदाई दी। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। ब्रह्मकुमारी ने हरीश के माथे पर चंदन का टीका भी लगाया। इसके बाद हरीश अपने अंतिम सफर पर निकल पड़े। इस दौरान हरीश के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं।

Harish Rana : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर में 13 सालों से मृतप्राय अवस्था में पड़े हरीश राणा को आखिरकार एम्स में भर्ती करा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उनके पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया को शुरू कराया गया है। लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। इस बीच गाजियाबाद स्थित घर से हरीश की आखिरी विदाई का वीडियो सामने आया है। इसमें एक सफेद कपड़ों में महिला मधुर मुस्कान के साथ हरीश राणा को आखिरी विदाई देती दिख रही हैं। इनके बारे में सवाल उठ रहा था कि आखिर वे कौन हैं? इसका जवाब सामने आया है। वे ब्रह्माकुमारी बहनें थीं। दरअसल, हरीश को एम्स में ले जाए जाने से पहले ब्रह्माकुमारी बहनें अशोक राणा के घर पहुंची थीं। हरीश के घर पर राजयोग कराया गया। इसके बाद उन्हें आखिरी विदाई दी गई। यह पल हर किसी के लिए भावुक कर देने वाला था।
ऐसे दी गई विदाई
ब्रह्माकुमारी ने हरीश राणा को टीका लगाने के बाद सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ हरीश। इन शब्दों के साथ उसे आखिरी विदाई दी गई। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल, 13 सालों से बेड पर वेजिटेटिव स्टेट में पड़े हरीश को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु को अनुमति दी थी। इसके बाद ब्रह्माकुमारी बहनों ने शुक्रवार को उसके राज एंपायर सोसायटी स्थित घर पहुंच कर आखिरी विदाई दी। ब्रह्माकुमारी राजयोग मेडिटेशन सेंटर की संचालक बीके लवली दीदी ने कहा कि राजनगर एक्सटेंशन स्थित केंद्र की बहनें हरीश राणा के घर गई थीं। उसके अस्पताल रवाना होने से पहले राजयोग मेडिटेशन कराया गया। बहनों ने परमात्मा को याद करते हुए हरीश की आत्मा को शक्ति देने के लिए यह योग कराया।
मिल जाएगी कष्टों से मुक्ति
राजयोग मेडिटेशन के दौरान ब्रह्माकुमारी ने कहा कि जाओ हरीश, वक्त आ गया। तुम्हारी तकलीफों के बस कुछ पल और बचे हैं। 2013 में जब तुम चंडीगढ़ में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तब चौथी मंजिल से गिर गए थे। इसके बाद से तुम बिस्तर पर ही पड़े हो। तुम्हारे शरीर और दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है। इसके बाद भी माता-पिता के लिए तुम ही सबकुछ रहे। 13 साल तक उन्होंने तुम्हारी सेवा की। ब्रह्माकुमारी बहन ने कहा, प्यारे हरीश, सुप्रीम कोर्ट ने तुम्हारी इच्छामृत्यु की याचिका को स्वीकृति दे दी है। अब तुमको कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।

विचलित हो गया हर किसी का मन
ब्रह्माकुमारी बहन ने जब माता-पिता के मन के भावों की बात शुरू की तो हर किसी का मन विचलित हो गया। हर किसी की आंखों में आंसू थे। ब्रह्माकुमारी ने कहा कि तुम्हारे माता-पिता के लिए आज का दिन बहुत भारी है। तुम न बोल सकते थे, न हंस सकते थे, फिर भी उनके लिए सब कुछ थे। तुम्हारा होना ही उनके लिए खुशी थी। सुकून था। जीवन था। तुम्हारे जाने के खालीपन का वे कैसे मुकाबला करेंगे? ब्रह्माकुमारी ने आगे कहा कि ये सोचकर मेरा मन भी भारी हो रहा है। फिर भी, जाओ हरीश! सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ। ब्रहमाकुमारी लवली दीदी ने कहा कि इसी क्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है। यह लोगों को भावुक कर रहा है। दरअसल, अशोक राणा ब्रह्माकुमारी केंद्र से जुड़े थे और रोजाना ध्यान करने जाते थे। वहीं, पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी। बोले- न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा है। हरीश 13 साल से कोमा में हैं। उन्हें इच्छामृत्यु के लिए शनिवार को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया है। परिवार ने घर से एम्स तक शिफ्टिंग की पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा। पड़ोसी और सोसायटी में रहने वालों को भनक तक नहीं लगी।
भावुक होकर रोने लगा पूरा परिवार
हरीश राणा को जब गाजियाबाद स्थित फ्लैट से एम्स ले जाया गया तो उस समय हरीश की मां, छोटा भाई और बहन भावुक हो गए। मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा ने कहा, 'हम सबसे माफी मांगते हैं, ऊपरवाले ने यह सब हमें देखने के लिए दिया। हम यही चाहते हैं कि हमारा बेटा जहां भी रहे, जिस परलोक में रहे, हमेशा हम उसे भूल नहीं पाएंगे।' पिता ने कहा- हमारे करीबियों, रिश्तेदारों, डॉक्टरों, कोर्ट में हमारी पैरवी करने वाले वकीलों और सभी ने हमारा बहुत सहयोग किया। हम सभी के इस सहयोग के आभारी रहेंगे।
मां के नहीं सूख रहे आंसू, बोलीं- बेटे ने कभी नहीं बताई अपनी पीड़ा
हरीश की मां के चेहरे पर सन्नाटा है। एकदम भाव शून्य चेहरा। कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं... कहती हैं-कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा। दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके, ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था।
हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए...
दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। तब से न वह बोल पा रहे हैं और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे हैं। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज पूरी तरह फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं होती। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है।

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