इत्र की नगरी में सत्तासीन हुई सावित्री सरकार, सामने है चुनौतियों का अम्बार

इत्र की नगरी में सत्तासीन हुई सावित्री सरकार, सामने है चुनौतियों का अम्बार

सिकंदरपुर, बलिया। सिकंदरपुर गांधी इंटर कालेज के प्रांगण में शुक्रवार को शपथ ग्रहण के साथ ही नगर की नई सरकार ने अपना कार्यभार संभाल लिया। सावित्री देवी ने दूसरी बार नगर पंचायत सिकंदरपुर का अध्यक्ष बनकर इतिहास दोहराया है, लेकिन उनके सामने विकास और जन भावनाओं के अनुरूप कार्य करने की कई बड़ी चुनौतियां भी है।अलबत्ता नव निर्वाचित अध्यक्ष का नगर की दर्जनों चुनौतियां इंतजार कर रही हैं, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।

वर्षों से नगर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में सुविधाओं का टोटा अपने अध्यक्ष का इस्तकबाल करने को पलक पावड़े बिछाए हुए है। मूलभूत सुविधाओं में शामिल सड़क, बिजली, पानी, नाली, नाला, सीवर लाइन जैसे अनेक विकास कार्य हैं, जो क्षेत्र में कराने होंगे। वजह कि नगर के लोगों को नए चेयरमैन से काफी उम्मीदें बंधी हुई है। पूरे कस्बे में नाले की समस्या काफी जटिल समस्या है। बारिश के दिनों में नगर क्षेत्र के आधे मोहल्लों के निवासी साल के चार महीने नबदान के गंदे पानी से दो चार हो नारकीय जीवन जीते है। अब जब की बारिश का मौसम आने में वक्त भी कम है, तो ऐसे में नगरवासियों को इस समस्या से निजाद दिलाने के लिए नए अध्यक्ष को काफी मेहनत करनी होगी।

इसके इतर बात यदि शुद्ध पेयजल की करें तो यह विडंबना ही है की आज तक यहां के लोगों को शुद्घ पेयजल भी मयस्सर नहीं हो पाया है। हालांकि हर पांच साल बाद सत्ता सुंदरी का सुख भोगने वालों ने समस्या समाधान का सपना तो दिखाया लेकिन कभी उसे पूरा करने की जहमत नहीं उठाई। एक बार फिर सिकंदरपुर की जनता टकटकी लगाए नए अध्यक्ष को निहार रही है कि शायद इस बार उनकी उम्मीदों को पंख लग जाए। हालांकि अधोसंरचना विकास के तो नगर क्षेत्र में ढेरों कार्य हुए हैं लेकिन स्वच्छ पेयजल सप्लाई की व्यवस्था आज तक न हो पाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

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इसके अलावा स्वच्छ भारत की संकल्पना को साकार करने की कड़ी में सहभागी बनी इत्र की नगरी को लबे सड़क लगे कूड़ों का अंबार प्रतिदिन आईना दिखाने का काम करता है। इसके अलावा उधड़ी सड़कें, मोहल्लों में फैली गंदगी और स्वच्छंद विचरण करते मवेशियों से होने वाली परेशानियों को दूर करना भी आसान नहीं है। यूं तो नगर क्षेत्र को चुनौतियों को गिनना शुरू किया जाए तो इसकी फेहरिस्त काफी लंबी हो जायेगी। फिर भी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी समस्याओं को नजरंदाज करना भी क्षेत्रीय जनता के साथ नाइंसाफी होगी। मसलन अतिक्रमण, हलक सुख चुके आरो वाॅटर प्लांट, नगर में मौत बनकर मंड़रा रहे हैं हाईटेंशन बिजली के जर्जर तार के साथ कुछेक मोहल्लों में नंगे तारों का फैला मकड़जाल, डॉक्टर कालोनी में ब्याप्त गंदगी ये सब समस्यों से जूझना नई अध्यक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। देखना दिलचस्प होगा कि नगर के विकास में नई अध्यक्ष क्या कुछ कर पाती हैं।

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अजीत कुमार पाठक

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