सर्वे में खुलासा : बच्चे स्कूल में किताबों को समझने लगे हैं मोबाइल



लंदन, एजेंसी : आज का बच्चा मोबाइल स्क्रीन से तो जल्दी दोस्ती कर लेता है, लेकिन किताब से नहीं। ब्रिटेन में आई एक नई रिपोर्ट इसी बदलते बचपन की तस्वीर पेश करती है। स्कूल की पहली कक्षा में पहुंचते ही कई बच्चे किताब को मोबाइल समझकर उस पर टैप या स्वाइप करने की कोशिश करते नजर आए।
ब्रिटेन में हुए एक ताजा सर्वे ने शुरुआती शिक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। सर्वे के अनुसार, पिछले साल प्राइमरी क्लास में दाखिला लेने वाले लगभग एक तिहाई बच्चे किताबों का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। कई बच्चों को किताब पलटना तक नहीं आता था और वे उसे स्मार्टफोन की तरह इस्तेमाल करने लगे।
तैयारी भी हो रही कमजोरः यह सर्वे शुरुआती शिक्षा से जुड़ी संस्था किंड्रेड स्क्वेयर्ड ने 1,000 प्राइमरी स्कूल स्टाफ के बीच किया। रिपोर्ट में सामने आया कि समस्या केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी जीवन कौशल में भी बच्चों की तैयारी कमजोर होती जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि कक्षा में पढ़ाने का बहुमूल्य समय अब बुनियादी कामों में खर्च हो रहा है।
स्कूल स्टाफ के अनुमान के मुताबिक, वे रोजाना औसतन 1.4 घंटे बच्चों की टॉयलेट संबंधी मदद में और करीब 2.4 घंटे पढ़ाई का समय ऐसे बच्चों पर लगा रहे हैं, जिन्हें सामान्य जीवन कौशल नहीं आते।
सर्वे में यह भी सामने आया कि 50% से ज्यादा शिक्षकों ने बच्चों के स्कूल के लिए तैयार न होने की सबसे बड़ी वजह बच्चों और माता-पिता का जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बताया। मोबाइल, टैबलेट और टीवी ने बच्चों की दिनचर्या, एकाग्रता और सीखने की आदतों को गहराई से प्रभावित किया है।
स्क्रीन पर निर्भरता से बच्चों के विकास पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती उम्र में स्क्रीन पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों के स्वाभाविक विकास को रोक रही है। जब बच्चे किताबों, खिलौनों और आम बातचीत से दूर रहते हैं, तो उनकी भाषा क्षमता, मोटर स्किल और आत्मनिर्भरता प्रभावित होती है। स्कूल की तैयारी का मतलब केवल अक्षर पहचानना नहीं, बल्कि खुद से खाना खाना, टॉयलेट जाना, किताब पकड़ना और निर्देश समझना भी है। इसके लिए माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है।

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