कृष्ण जन्माष्टमी पर स्मिता सिंह ने बनाई शब्दों की माला 'आयी है ये शुभ घड़ी...'
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कृष्ण जन्माष्टमी विशेष
विधा : दोहे
आयी है ये शुभ घड़ी, जन्मे कान्हा लोक।
टूट गयी सब बेड़ियाँ, रोक सके तो रोक।।
शीश धरे प्रभु को चले, पावन गोकुल धाम।
कान्हा की छवि देखकर, सफल किये सब काम।।
बूंदें बरसे टूट कर, छाए काले मेघ।
करके रक्षा कृष्ण की, शेषनाग लें पेघ।।
कालिंदी का जल चढ़ा, ले पग रज की चाह।
प्रभु पग का वंदन किया, और छोड़ दी राह।।
मंद-मंद मुस्कान है, चंचल प्रभु के नैन।
लीला ऐसी रच रहे, हुए पिता बेचैन।।
स्मिता सिंह, सहायक अध्यापिका, बाराबंकी

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