बलिया : इंसानों को कौन कहें बेजुबानों की आंखों का कोर भी भींगा गये पांच दोस्त

बलिया : इंसानों को कौन कहें बेजुबानों की आंखों का कोर भी भींगा गये पांच दोस्त



बैरिया, बलिया। हर कोई स्तब्ध था। घरों में आंसुओं का सैलाब बह रह रहा था। गलियों में सन्नाटा पसरा था। पेड़-पौधों के पत्तों तक ने झलना बंद कर दिया था। खूंटे पर बंधे मवेशियों की आंखें भी नम थी। माहौल ऐसा, मानों धरती से लेकर आसमां तक सिसक रहा हो। यह नजारा है बैरिया थाना क्षेत्र के टोला फखरू राय गांव का। यहां पांच बच्चों की मौत से हर कोई सहमा था। 

गांव के लवकुश यादव (16) पुत्र अवधेश यादव, विकास यादव (16) पुत्र संतोष यादव, पप्पू यादव (10) पुत्र परमात्मा यादव, विशाल यादव (14) पुत्र उद्धव यादव व लालू यादव (8) पुत्र जयप्रकाश यादव सोमवार को अपने पट्टीदार धनजी यादव की माता के दशकर्म पर बाल मुंडवाने थे। वहीं से सरयू नदी में स्नान करने चले गये, जहां काल उनका इंतजार कर रहा था। पांच बच्चों के डूबने की सूचना से पूरे इलाके में हड़कम्प मच गया। 


इस बीच, घाघरा नदी मे डूबे पांच में लव कुश यादव, विशाल यादव, अप्पू यादव व विकास यादव का शव गोताखोरो ने नदी से निकाल लिया। अपने जिगर के टुकड़ों का शव देख परिजन दहाड़े मारने लगे। कई तो शव को कलेजे से लगाकर यह कह-कह चूमने लगे कि 'हमार बाबू, तू ठीक बाड़, तहरा कुछु नइखें भईल... बोल ! हमार बाबू, कुछु बोल ना।' यह हृदयविदारक दृश्य देख मौजूद हर किसी की आंखों का कोर भींग गया। वही, लालू का शव अभी भी नहीं मिल पाया है। गोताखोर उसके शव की तालाश में लगे हुए थे। पुलिस ने चारों शव को कब्जे में ले लिया है।

शिव दयाल पांडेय 'मनन

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