जिस बेटे की इसी महीने होनी थी शादी, वह दे गया जिन्दगी भर का दर्द
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लखनऊ। पंजाब में रोजी-रोटी कमाने गए लखनऊ के निगोहां के 32 वर्षीय दिवाकर की वहां मौत हो गई। यहां उसकी शादी की तैयारी में जुटे घरवालों को यह खबर मिली तो कोहराम मच गया। घरवालों ने उसका शव लाने के लिए निगोहां थाने से लेकर प्रशासन तक का दरवाजा खटखटाया। लेकिन, कोराना संक्रमण की दहशत के चलते पंजाब प्रशासन ने बिना जांच के शव देने से मना कर दिया।
दखिना गांव निवासी नन्हकू खेतिहर मजदूर हैं। उनका छोटा बेटा दिवाकर पंजाब के जालंधर में एक निजी कॉलेज की कैंटीन में बड़े भाई देवानंद के साथ काम करता था। बड़ा बेटा लॉकडाउन से पहले गांव आ गया था। 13 अप्रैल को कॉलेज से सूचना मिली कि दिवाकर की मौत हो गई है। भाई के अंतिम दर्शन के लिए उसने निगोहां थाने से लेकर प्रशासन तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोरोना महामारी की दहशत के चलते पंजाब प्रशासन ने उसका शव बिना जांच के देने से मना कर दिया। देवानंद ने बताया कि दिवाकर बुखार से पीड़ित था। वहां के प्रशासन ने कहा है कि बुधवार को शव का पोस्टमार्टम होगा। अगर, कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है तो शव का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाएगा। इंस्पेक्टर निगोहां चिरंजीव मोहन ने बताया कि पंजाब पुलिस से बात की गई, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कुछ हो सकेगा। पिता नन्हकू ने बताया कि दिवाकर की शादी रायबरेली में तय हुई थी। इसी महीने शादी होनी थी। पर, अब बेटे के सिर सेहरा देखना तो दूर उसके अंतिम दर्शन होंगे या नहीं, इसी पर असमंजस है।
Tags: बलिया

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