सोच को सलाम : कोरोना योद्धा बना बलिया का यह शिक्षामित्र

सोच को सलाम : कोरोना योद्धा बना बलिया का यह शिक्षामित्र


मझौवां, बलिया। लॉक डाउन के चलते सब्जी की खेती करने वाले किसानों की कमर टूट गई हैं। कोरोना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सब्जी की खपत नहीं होने से किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में दिन रात मेहनत कर फसल उगाने वाले किसान अपनी उपज फ्री या औने-पौने दाम पर खपा रहे है। लौकी की लागत मूल्य कम से कम ₹10 है, लेकिन ₹5 में भी बिक्री नहीं हो पा रहा है। हालांकि इन सबके बीच एक शिक्षामित्र कोरोना योद्धा के रूप में काम कर रहा है, जिसकी प्रशंसा क्षेत्र में खूब हो रही है।

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बैरिया तहसील क्षेत्र के नवकागांव निवासी किसान व शिक्षामित्र गुप्तेश्वर सिंह अपनी खेत की उपज फ्री में बंटवा रहे है। बताया कि वे इस साल लौकी की खेती किये थे, जिसकी उपज भरपुर हो रही है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब्जी मंडी तक नहीं जा पा रही। ऐसे में नर सेवा नारायण सेवा मान कर लौकी का वितरण पूरे क्षेत्र में फ्री में कराना शुरू कर दिया हूं। कोरोना की इस महामारी के बीच जरूरतमंदों तक यह हरी सब्जी पहुंचाकर काफी खुश हूं। कम से कम आशीर्वाद तो मिल ही रहा है। 




बताया कि जितना हो सकता है, जरूरतमंदों की सेवा जारी है। लौकी की उपज अधिक होने से राशन दुकानों पर भी रखवा दे रहा हूं। इससे गरीबों को राशन के साथ सब्जी भी फ्री में मिल जा रही है। यही हालात प्याज की भी खेती करने वाले किसानों की हो गई है। लागत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

हरेराम यादव

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