बलिया में बाढ़ : बिगड़ा घाघरा का रूप, काम आया बम्बूक्रेट

बलिया में बाढ़ : बिगड़ा घाघरा का रूप, काम आया बम्बूक्रेट

बैरिया, बलिया। उतरी दियरांचल के गोपालनगर टाड़ी पर सरयू नदी में अचानक कटान तेज होने से जिओ बैग विधि से कराए गए करीब 50 फुट लम्बा व 10 फुट चौड़ा कटान रोधी कार्य नदी में समा गया। इसकी जानकारी होने पर बुधवार को बाढ़ खण्ड के एक्सईन संजय मिश्र ने निरीक्षण किया। 

इस दौरान एक्सईन ने कहा कि बाढ़ खण्ड के सहायक अभियंता अमृतलाल व अवर अभियंता रजनीकांत राय मंगलवार को मौके पर पहुंचकर काफी हद तक डैमेज कन्ट्रोल करने में सफलता हासिल कर लिया है। जहां भी जिओ बैग कार्य सरयू नदी में समा चुका था, वहां पर बम्बूक्रेट में ईंट की बोरियां डालकर स्लोप पर लगाया गया है, जिससे डैमेज कंट्रोल है।

बता दें कि मंगलवार को जिओ कार्य का कुछ हिस्सा सरयू नदी में समा चुका था। वहीं कटान रोधी कार्य के बगल में कटान तेज हो गया, जिससे गोपालनगर टाड़ी गांव में अफरा-तफरी मच गई।कटान की सूचना पर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अमृतलाल सहयोगियों के साथ पहुंचकर कटान रोकने को जुट गए।

एक्सईन संजय मिश्र, सहायक अभियंता अमृतलाल व अवर अभियंता रजनीकांत राय ने बताया कि अगर जिओ बैग द्वारा कटान रोधी कार्य नहीं हुआ होता तो स्थिति बिगड़ सकती थी। सरयू नदी की मुख्यधारा है और नदी के निचले स्तर से कटान हो रहा है, जिससे कुछ हिस्सा डैमेज हुआ था। अब कंट्रोल कर लिया गया है। 


शिवदयाल पांडेय मनन

Related Posts

Post Comments

Comments

Latest News

सोनभद्र सड़क हादसे में बलिया के दो युवकों की मौत सोनभद्र सड़क हादसे में बलिया के दो युवकों की मौत
बलिया : सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र अंतर्गत हाथीनाला में हुए सड़क हादसे में जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के अवायां...
बलिया में आग का कहर : बेटी की शादी को रखे नगदी और कीमती सामान राख, किशोरी झुलसी
बलिया में गला काटकर युवा दुकानदार की हत्या, खेत में फेंका मिला शव
व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है स्काउट गाइड प्रशिक्षण : डॉ. जनार्दन राय
बलिया में कोचिंग के लिए निकला छात्र नहीं लौटा घर, अज्ञात बाइक का लिया सहारा, पुलिस जांच में जुटी
निरंतर प्रगति के पथ पर बलिया का यह सरकारी स्कूल : नूतन सत्र् में कुछ यूं करेगा बच्चों की आगवानी, जानें इसकी खास उपलब्धियां
गाजीपुर सिटी स्टेशन : आकर्षण का केन्द्र बनी रेलवे कॉलोनी में खाली पड़ी भूमि, इंजीनियरों की सोच ने बदली तस्वीर