संक्रमण से बचाव का अच्छा तरीका हाथ धुलाई : डॉ. आशुतोष कुमार सिंह

संक्रमण से बचाव का अच्छा तरीका हाथ धुलाई : डॉ. आशुतोष कुमार सिंह



रसड़ा, बलिया। बाबा रामदल सूरजदेव स्मारक पीजी कालेज पकवाइनार, रसड़ा मेंं गुरुवार को विश्व हाथ धुलाई दिवस पर बेविनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं को हाथों की सफाई के लिए शपथ दिलाई गयी।
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि साफ सफाई ही बीमारी से लड़ने का पहला हथियार होती है। बीमारियों के संक्रमण से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका हाथ धुलाई से शुरू होता है। अधिक मौतें साफ सफाई न होने से ही होती है।विशेषज्ञों के अनुसार स्वच्छ हाथ ही हमारे स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन की कुन्जी है। सफाई नहीं होने पर संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है। कुछ लोग शौच के बाद हाथ को मिट्टी से धोते हैं, जो गलत है। हाथ को साबुन या हैंडवाश से धोना चाहिए।  महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक शिवेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि आज पूरा भारत सहित विश्व कोरोना जैसे महामारी से जूझ रहा है, जिससे बचावके लिए हाथों की सफाई और चेहरे पर मास्क लगाना जरूरी है।बेविनार में महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आशुतोष कुमार सिंह, डाॅ. अब्दुल रब, सिद्दीकी, आनंद विक्रम सिंह, संतोष कुमार, प्रमोद कुमार, श्रीमती प्रियंका सिंह, प्रियंका यादव, अवनीश मिश्रा आदि ने संबोधित किया।

शिवानंद बागले

Related Posts

Post Comments

Comments

Latest News

सोनभद्र सड़क हादसे में बलिया के दो युवकों की मौत सोनभद्र सड़क हादसे में बलिया के दो युवकों की मौत
बलिया : सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र अंतर्गत हाथीनाला में हुए सड़क हादसे में जनपद के उभांव थाना क्षेत्र के अवायां...
बलिया में आग का कहर : बेटी की शादी को रखे नगदी और कीमती सामान राख, किशोरी झुलसी
बलिया में गला काटकर युवा दुकानदार की हत्या, खेत में फेंका मिला शव
व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है स्काउट गाइड प्रशिक्षण : डॉ. जनार्दन राय
बलिया में कोचिंग के लिए निकला छात्र नहीं लौटा घर, अज्ञात बाइक का लिया सहारा, पुलिस जांच में जुटी
निरंतर प्रगति के पथ पर बलिया का यह सरकारी स्कूल : नूतन सत्र् में कुछ यूं करेगा बच्चों की आगवानी, जानें इसकी खास उपलब्धियां
गाजीपुर सिटी स्टेशन : आकर्षण का केन्द्र बनी रेलवे कॉलोनी में खाली पड़ी भूमि, इंजीनियरों की सोच ने बदली तस्वीर