बलिया में हिन्दी पखवारा : सभी देश को एक सूत्र में जोड़ सकती है हिन्दी
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बलिया। हिन्दी दिवस पखवारा के तहत रविवार को भारतीय सद्भावना मिशन के काशीपुर स्थित कार्यालय पर गोष्ठी आयोजित की गई। बतौर मुख्य वक्ता प्रो. जैनेन्द्र पांडेय ने कहा कि हिन्दी का विकास संघर्षो के बीच हुआ है। हिन्दुस्तान की जनता इसे राष्ट्रभाषा स्वीकार कर चुकी है। मैं आशावादी हूं। मुझे यकीन है कि एक न एक दिन हिन्दी वैश्विक क्षितिज पर विश्व भाषा बनकर उभरेगी। हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो सभी देश को एक सूत्र में जोड़ सकती है।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने संस्कृत को मां, हिन्दी को गृहणी व अंग्रेजी को नौकरानी के रूप में व्याख्यांकित किया। कहा कि हिन्दी न केवल भारत, वरन विश्व भाषा के रूप में स्थापित हो चुकी है। सरकार की फाइलों में राजभाषा और जनमानस में हिन्दी राष्ट्रभाषा है। हिंदी में ही वो ताकत है, जिसकी मदद से जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक संवाद स्थापित किया जा सकता है। गोष्ठी में सत्येन्द्र सिंह, पं. रमाशंकर पांडेय, श्रीनिवास यादव, रजनीश चौबे, श्रीप्रकाश मिश्र, सुरेश मिश्र इत्यादि मौजूद रहे।
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