गर्भवती पत्नी की अर्थी के लिए नहीं मिले चार कंधे, फिर...

गर्भवती पत्नी की अर्थी के लिए नहीं मिले चार कंधे, फिर...


बलरामपुर। कोरोनावायरस के संकट काल में इसके मायने बदल गए हैं। कुछ ऐसा ही उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के रहने वाले दद्दन के साथ हुआ। वह रोजी रोटी की तलाश में लुधियाना गया था। जहां उसकी 9 माह की गर्भवती पत्नी की मौत हो गई। डॉक्टरों ने कोविड-19 की जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन, लोगों ने महिला के शव को कंधा देने से मना कर दिया। आखिरकार दद्दन को 27 हजार रुपए कर्ज लेकर 1,137 किमी दूर एंबुलेंस से पत्नी का शव गांव लाना पड़ा।

लुधियाना रहता था दद्दन

बलरामपुर के कठौवा गांव निवासी दद्दन अपनी पत्नी गीता और तीन बच्चों के साथ लुधियाना में रहकर मजदूरी करता था। वह पीओपी यानी प्लास्टर ऑफ पेरिस के काम में माहिर है। इसलिए, परदेश में भी रोजी रोटी चल रही थी। उसकी पत्नी गर्भ से थी। पत्नी को वह गांव लाना चाहता था, लेकिन लॉकडाउन के बीच लुधियाना में ही फंस गया। इस बीच 26 अप्रैल को अचानक उसकी पत्नी की तबियत खराब हो गई। वह उसे अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने एहतियातन पत्नी की कोविड-19 संक्रमण की जांच के लिए सैंपल लैब को भेजा। इसके साथ ही शव को अपनी कस्टडी में ले लिया।

चार दिनों तक अस्पताल व घर के चक्कर लगाता रहा

चार दिनों तक दद्दन अपने मासूम बच्चों को लेकर अपना दर्द समेटे घर और अस्पताल के बीच भटकता रहा। 30 अप्रैल को कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने गीता का शव उसे सौंपा। लॉकडाउन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे दद्दन ने पहले शव का अंतिम संस्कार लुधियाना में करने का निर्णय लिया। लेकिन पड़ोसियों ने कोरोना और लॉकडाउन के कारण शव को कंधा देने से हाथ खड़े कर दिए। अब उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि, वह क्या करे? कुछ देर तक सोचने समझने के बाद उसे पत्नी का अंतिम संस्कार अपने गांव में करने का निर्णय लिया। लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह पत्नी का शव गांव तक ला सके। इसके लिए दद्दन ने अपने कुछ संबंधियों से 27 हजार रुपए कर्ज लिए और एम्बुलेंस का इंतजाम किया।

एंबुलेंस का इंतजाम होने पर वह पत्नी का शव लेकर 1137 किलोमीटर का सफर तय करने के लिये अपने गांव निकल पड़ा। ये सफर जितना लंबा था, उससे कहीं अधिक पत्नी से जुदाई का गम था। चिरनिद्रा में लीन गीता को देखकर बच्चे पिता से पूछते थे कि मां को क्या हुआ है? इसका जवाब दद्दन के पास नहीं था। वह आंखों में आंसू लिए बच्चों को ढांढस बंधाता रहा। 20 घंटे लगातार सफर के बाद बीते शुक्रवार को दद्दन अपने गांव कठौवा पहुंचा। जहां उसने पत्नी के शव का अंतिम संस्कार किया।

तीनों बच्चों के साथ दद्दन क्वारंटाइन

दद्दन को परिवार के बीच रहने को नहीं मिला। बूढ़े मां-बाप को दद्दन अभी ये भी ठीक से बता नहीं पाया था कि, वे जिस अजन्मे बच्चे को लेकर कई तरह के सपने संजो रहे थे वह अब नहीं है। उसे 9 माह तक अपने गर्भ में पालने वाली उनकी बहू भी अब कभी नहीं लौटेगी। ग्राम प्रधान ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को प्रवासी मजदूर के गांव आने की सूचना दी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दद्दन और उसके तीन मासूम बच्चों मधु (7) सुमन (6) और शिवम (5) को गांव में बने क्वारैंटाइन सेंटर में भेज दिया है।



Related Posts

Post Comments

Comments

Latest News

8th Pay Commission : फिटमेंट फैक्टर पर बलिया के शिक्षक ने लिख डाली पूरी हिस्ट्री, जानें ताजा अपडेट 8th Pay Commission : फिटमेंट फैक्टर पर बलिया के शिक्षक ने लिख डाली पूरी हिस्ट्री, जानें ताजा अपडेट
जिस हिसाब से सोशल मीडिया पर आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) की खबरें तैर रही हैं, उस हिसाब से...
Half Encounter In Ballia : बलिया पुलिस पर फायर करना बदमाश को पड़ा भारी
15 March Ka Rashifal : जानिएं कैसा रहेगा अपना Sunday
Ballia News : प्रसूता और जुड़वा नवजात की मौत मामले में डॉक्टर सहित छह पर मुकदमा
बलिया में महिला से अभद्रता, मारपीट और आभूषण छीनने पर  FIR
बलिया में संदिग्ध परिस्थितियों में किशोरी लापता, युवक पर अपहरण का मुकदमा
सजेंगे विद्यालय, होगा बच्चों का स्वागत : स्कूल चलो अभियान को लेकर बलिया BSA ने जारी किया विस्तृत दिशा-निर्देश