बलिया : घर में बूढ़ी मां, पत्नी और दो नादान बच्चे है, वे कैसे आयेंगे ; मुझे जाने दीजिए

बलिया : घर में बूढ़ी मां, पत्नी और दो नादान बच्चे है, वे कैसे आयेंगे ; मुझे जाने दीजिए


बैरिया, बलिया। दोनों पैरों से दिव्यांग बिहार के कैमूर जनपद अंतर्गत कुदरा थाना क्षेत्र के दोकरी गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार सिंह ने 16 किमी की यात्रा की। तीन दिनों से भूखे-प्यासे धर्मेंद्र मुंबई के कल्याण स्थित एक पावर प्लांट में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता था। कोरोना के चलते काम बंद हो जाने के बाद ठेकेदार ने एक ट्रक से उसे अन्य मजदूरों के साथ बिहार के बक्सर बार्डर पर छोड़ने को कहा, किंतु ट्रक चालक ने गलती से उसे मांझी (छपरा) के बिहार बार्डर पर उतारकर बुधवार को चला गया। 

किसी तरह घसीटते हुए पूरे दिन सड़क के किनारे-किनारे चलकर 35 वर्षीय धर्मेंद्र लगभग तीन बजे भूखे-प्यासे बैरिया पहुंचा। पुलिस सहायता केंद्र पर तैनात सिपाही विनोद कुमार यादव व अन्य ने उसे भोजन कराया। पानी पिलाया। उसके बाद किसी वाहन से उसे बलिया भेजवा दिया। वहां से वह बक्सर जाएगा।

चलने फिरने में पूरी तरह असमर्थ धर्मेंद्र का अकेला सफर उसे मंजिल तक कैसे पहुंचाएगा? यह चिंतनीय है, क्योंकि बैरिया से भी उसका घर लगभग 200 किमी दूर है। यहां उससे कहा गया कि आपको यही कहीं क्वारंटाइन करा दिया जा रहा है। घर के लोगों को बुलाकर चले जाना। इस पर धर्मेंद्र का गला रुंद्ध गया। फिर बोला, घर में अकेले मैं कमाने वाला बालिग हूं। बूढ़ी मां, पत्नी व दो छोटे-छोटे बच्चे परिवार में है। वे लोग कैसे आएंगे। ऊपर वाले की कृपा हुई तो मुंबई से एक हजार किमी दूर यहां तक आ गए तो यहां से भी किसी तरह अपने गांव पहुंच ही जाएंगे।

शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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