लेखपाल के लिए डीएम के आदेश का कोई औचित्य नहीं !
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बांसडीह, बलिया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार कहा था कि जिलाधिकारियों का तबादला करना आसान है, लेकिन लेखपालों का स्थानांतरण लोहे का चना चबाने जैसा है। लेखपालों की पहुंच बहुत ऊपर तक होती है। यह कथन जिले के बांसडीह तहसील अन्तर्गत एक लेखपाल पर सटीक बैठती है। इस लेखपाल के रसूख के आगे एसडीएम की कौन कहे डीएम का आदेश भी बेअसर है।
प्रशासनिक रुटीन के तहत पिछले साल अगस्त माह में वर्षों से एक ही गांव में जमे करीब दो दर्जन लेखपालों का तबादला एसडीएम के स्तर से किया किया गया। इसमें एक नाम अविनाश सिंह का था। आदेश के तहत इनको हरिहाकला से हटाकर रेवती का चार्ज दिया गया था, जबकि विसौली में तैनात लेखपाल अजित कुमार सिंह को हरिहाकला में तैनात किया गया। पर अफसोस उक्त आदेश आज भी रद्दी की टोकरी में पड़ा है। ताज्जुब की बात यह है इसी आदेश पर अन्य लेखपाल नवीन कार्यस्थल पर योगदान दे रहे हैं, लेकिन अविनाश सिंह अभी भी वहीं डटे हैं।
इससे परेशान होकर ग्रामीणों ने 29 जून को जिलाधिकारी से शिकायत कर लेखपाल अविनाश सिंह को तत्काल हटाने की मांग की। उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम बांसडीह को तत्काल उक्त लेखपाल से चार्ज हस्तानांतरण व नवीन तैनाती स्थल पर योगदान सुनिश्चित कराने का आदेश निर्गत किया। पर अफसोस डीएम के आदेश के लगभग एक माह बाद भी लेखपाल ने अभी तक हरिहाकलां का चार्ज नहीं दिया है और रेवती का भी चार्ज इन्होंने ले लिया है। सूत्रों की माने तो ये रेवती में कार्य भी कर रहे है।
स्थानांतरण आदेश के बाद भी चार्ज न छोड़ना अनुशासनहीनता है। मामला संज्ञान में है, लेकिन कोविड-19 के कारण किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। समय आते ही जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दुष्यंत कुमार मौर्य, SDM बांसडीह
विजय गुप्ता
विजय गुप्ता
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