बलिया में अनोखी शादी : शादियां तो बहुत देखी होंगी, पर ऐसी नहीं ; देखें Video

बलिया में अनोखी शादी : शादियां तो बहुत देखी होंगी, पर ऐसी नहीं ; देखें Video


दुबहर, बलिया। शादियां तो आप बहुत देखे होंगे, पर हम आपको एक ऐसी शादी के बारे में बता रहे है, जिसकी चर्चा हर जुबां पर है। उत्तर प्रदेश के बलिया में गुरुवार को हुई इस शादी में न सिर्फ वर-कन्या, बल्कि घराती-बाराती भी कुछ अलग थे। यह अनूठी शादी गुरुवार की देर शाम दुबहर स्थित नुनुआ बाबा के स्थान पर हजारों लोगों की मौजूदगी में सम्पन्न हुई। 


दुबहर निवासी समाजसेवी राकेश कुमार सिंह द्वारा आयोजित इस शादी की सुबह से ही लोगों की जुबां पर तैरने लगी थी, जो शाम होते होते भीड़ में बदल गयी। नुनुआ बाबा के स्थान पर विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोचार एवं महिलाओं की मांगलिक गीत के बीच दिव्यांग कन्या सुमन पुत्री मदन पासवान तथा बवना वर बब्बन पुत्र परशुराम ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरा लिया। इस अलौकिक पल को अपनी मोबाइल में कैद करने को हर कोई उत्साहित दिखा।समाजसेवी राकेश कुमार सिंह ने वर एवं वधू को उपहार स्वरूप वस्त्र, आभूषण, बक्से, अटैची एवं अन्य आवश्यक सामान प्रदान किया। समाजसेवी राकेश कुमार सिंह की इस पहल की प्रशंसा हर जुबां कर रही थी।इस अवसर पर परमहंस पांडेय, चतुरा पांडेय, विनोद पांडेय, अमित कुमार पांडेय, पंडा तिवारी, विनोद तिवारी, शुभनारायण तिवारी, सत्यप्रकाश पांडेय, कामता सिंह, वीरनारायण सिंह, नन्हे सिंह, प्रदीप सिंह आदि उपस्थित रहे।

राकेश कुमार सिंह की पत्नी नीतू सिंह भी बढ़-चढ़कर बंटाती है हाथ

पारिवारिक दायित्व निभाने के साथ असहाय एवं पीड़ित मानव की सेवा ही समाजसेवा का असली उदाहरण है, जिसे राकेश कुमार सिंह धरातल पर उतार रहे है। गरीब कन्याओं के वैवाहिक कार्यक्रम में राकेश कुमार सिंह की पत्नी नीतू सिंह भी बढ़-चढ़कर हाथ बंटाती है। उन्हें प्रोत्साहित करती हैं। नि:स्वार्थ भाव से प्रत्येक वर्ष अपने व्यक्तिगत खर्च पर असहाय एवं गरीब माता-पिता की कन्याओं का विवाह धूमधाम से यथोचित उपहार प्रदान कर कराने वाले.राकेश कुमार सिंह बीते अक्टूबर से अब तक दुबहड़, छोटका दुबहड़, मिश्र के छपरा, मिल्की आदि गांवों में कई कन्याओं का विवाह करा चुके है। श्री सिंह ने कहा कि असहाय एवं गरीबों की सेवा करना भी राष्ट्र सेवा के समान है। नि:स्वार्थ भाव से मानव एवं मानवता की सेवा करना असली राष्ट्र धर्म है। कन्यादान करना मनुष्य के लिए एक श्रेष्ठ कर्म है। 

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