शार्ट सर्किट से लगी आग ने निगली चार जिंदगियां,उजाड़ी वीरेन्द्र की गृहस्थी

शार्ट सर्किट से लगी आग ने निगली चार जिंदगियां,उजाड़ी वीरेन्द्र की गृहस्थी


रेवती/बलिया। रेवती थाना क्षेत्र के चौबे छपरा गांव में शुक्रवार की रात आग की चपेट में आने से एक परिवार की दो बहुएं तथा एक 7 वर्षीय बालक की जलने से मौत हो गई।उधर बेटी को देखने गयी मृत महिला की मां भी बेटी का शव देखने के बाद जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया।
घटना के बारे में बताया जाता है कि चौबे छपरा गांव के वीरेंद्र सिंह के घर रात 9.30 बजे अचानक शार्ट सर्किट से निकली आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस आग में उनकी बहु सीमा देवी पत्नी मनबोध कुमार सिंह (29), काजल पत्नी मनोज कुमार सिंह (28) तथा पोता राजबीर पुत्र मनबोध सिंह (7) आग के चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गए। उधर बचाने में  वीरेंद्र सिंह (55) भी आंशिक रूप से झुलस गए। इसी में मीरा देवी पत्नी विरेंद्र सिंह भागदौड़ में गिरने से चोटिल हो गईं।

घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सीओ बैरिया उमेश कुमार, एसएचओ राकेश कुमार सिंह व अनिल चन्द्र त्रिपाठी आदि ने सभी झुलसे लोगों को सीएचसी रेवती पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने काजल को मृत घोषित कर दिया तथा अन्य सभी झुलसे लोगों को जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया। जिला चिकित्सालय में पहुंचने के बाद इलाज के दौरान सीमा देवी तथा बालक राजवीर की भी मौत कुछ देर बाद हो गई। उधर सीमा की मां रेवती निवासिनी प्रभावती देवी पत्नी स्व.रामा राय (55) अपनी पुत्री तथा पौत्र को देखने जब जिला चिकित्सालय पर पहुंची तो अस्पताल में ही गिर कर दम तोड़ दिया। परिवार के मुखिया वीरेंद्र सिंह के तहरीर के मुताबिक आग शार्टसर्किट के चलते लगी थी।
उधर प्रभावती देवी का शव रेवती पहुंचने के बाद सीमा का भाई संजीत राय रेवती ने बताया कि मामला संदिग्ध है। मेरी बहन को वहां कई बार उसके देवर आदि द्वारा पीटा गया था। विगत 25 मार्च को भी मेरी बहन के साथ मारपीट की घटना हुई थी। मैं वहां पहुंचा भी था, लेकिन परिवार का कोई पुरुष सदस्य वहां नहीं मिला। इस संबंध में सीओ बैरिया उमेश कुमार ने बताया कि शार्ट सर्किट द्वारा आग लगने तथा उससे मौत की तहरीर वीरेंद्र सिंह द्वारा दी गई है। मामले की जांच की जा रही है। अंत्य परीक्षण रिपोर्ट आने के पश्चात मामला स्पष्ट हो जाएगा।


बेटी की मौत देख मां के उड़े प्राण पखेरु

 क ही घर में एक ही दिन तीन मौत की वजह से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। इसी बीच अपनी मृतका को देखने गई मां का जिला चिकित्सालय में हार्ट अटैक से मौत हो गई। जिसकी वजह से मृतका के मायका रेवती में भी मातम का माहौल है। हुआ यूं कि चौबे छपरा में शुक्रवार की संदिग्ध अवस्था जलने से एक ही परिवार के 3 सदस्य की मौत की क्रमशः काजल 28 वर्ष पति मनोज कुमार सिंह,सीमा देवी 29 वर्ष पत्नी मनबोध सिंह तथा सीमा का 7 वर्षीय पुत्र राजवीर की मृत्यु हो गई।काजल की मृत्यु तो घटनास्थल पर ही हो गई थी परंतु सीमा तथा राजवीर की मृत्यु जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान हुई थी। सूचना मिलने पर सीमा की मां प्रभावती देवी 55 वर्ष पत्नी स्वर्गीय रमा राय, भाई संजीत राय तथा अन्य लोग जिला चिकित्सालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि पुत्री की मृत्यु की सूचना तो उसकी मां प्रभावती को थी लेकिन पौत्र की मृत्यु की सूचना उनको नहीं थी।जिला चिकित्सालय में पौत्र राजवीर के मरने की बात पता चली तो प्रभावती वहीं गिर पड़ी तथा उनके प्राण पखेरू उनका साथ छोड़ दिया। प्रभावती को परिजन अपने गांव रेवती लेकर आ गए।जहां प्रभावती के पुत्र संजीत, पिण्टू, टिंकू तथा विवाहिता पुत्री रिंकू एवं पुत्रवधू सुनीता का रोते-रोते बुरा हाल है।


काल के क्रूर पंजों ने उजाड़ी ‘वीरेन्द्र’ की गृहस्थी

जब वह होश में आती थी उसकी जुबां पर बस एक ही बात की रट लगी रहती थी। ‘अरे बबुआ हो बबुआ, हमरा के छोड़ी के कहां गइल हो बबुआ’ यह कहते हुए पुनः बेहोशी के सागर में खो जाती थी।पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। सन्नाटे को चीरती फिर वही आवाज। वह अपने पौत्र के गम में बिलख रही थी। काल के क्रूर पंजों ने उसके परिवार को ऐसा जकड़ा कि उसके दो पुत्र वधू काजल एवं सीमा तथा एक पौत्र राजवीर असमय ही काल के गाल में समाप्त गये। परिवार में महिला सदस्य के नाम पर बची एकमात्र 50 वर्षीय मीरा देवी पत्नी विरेन्द्र सिंह की स्थिति रोते-रोते बेहद दयनीय है। वह विलाप करते-करते बार-बार बेहोश हो जा रहे है। परिवार के तीन अहम सदस्यों की मौत तथा पति के झुलस कर घायल होने की वजह से टूट चूकी मीरा को पड़ोसी ढाढ़स दे रहे है, लेकिन वह ढाढ़स किसी काम नहीं आ रहा है।

थाल में रखा भोजन भी झुलसा

 काल इतना भी निर्दयी हो सकता है यह बात चौबे छपरा की घटना देखने के बाद पता चलता है।क्योंकि जिस कमरे में घटना हुई उस कमरे में बकायदा थाली में परोस कर खाना रखा हुआ था जो घटना के पश्चात और जली अवस्था में वहीं था। तात्पर्य है कि काल के क्रूर पंजों ने अपने पंजों में जकड़ आने से पूर्व उसे भोजन करने का मौका भी नहीं दिया।


रिपोर्ट- अनिल केसरी

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