शौर्य पूर्ण बलिदान दिवस पर कुंवर सिंह पीजी कॉलेज ने कुछ यूं किया 1857 के नायक को याद

शौर्य पूर्ण बलिदान दिवस पर कुंवर सिंह पीजी कॉलेज ने कुछ यूं किया 1857 के नायक को याद

बलिया। 80 वर्ष की अवस्था में अपने युद्ध कौशल से अंग्रेजी सेना को परास्त करने वाले वीर कुंवर सिंह का शौर्य पूर्ण बलिदान दिवस पर कुंवर सिंह पीजी कॉलेज में समृद्ध संगोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. अंजनी कुमार सिंह ने की। इससे पहले महाविद्यालय परिवार के सदस्यों के साथ प्राचार्य ने कुंवर सिंह चौराहे पर स्थित आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। संगोष्ठी में प्राध्यापकों ने '1857 का संग्राम एवं कुंवर सिंह' कुशल योद्धा का शौर्य बलिदान, दोआब की संस्कृति एवं कुंवर सिंह, इतिहास की मुख्य धारा में कुंवर सिंह का स्थान इत्यादि विषयों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। 

डॉ सत्य प्रकाश सिंह ने जननायक के रूप में याद किया, जिनके आह्वान पर जनता अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार थी। डॉ अजय कुमार पाठक ने कुंवर सिंह को एक ऐसा नेता बताया, जिनके पीछे सभी धर्मों के लोग बलिदान देने को तत्पर थे। संगोष्ठी में इतिहास विभाग से डॉ सुरेंद्र कुमार ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे महान वीर सपूत को इतिहास के पन्नों में बहुत कम स्थान मिल सका है। यह क्षेत्रीय इतिहासकारों का उत्तरदायित्व है कि वे अपने शोधपरक अध्ययन से कुंवर सिंह को राष्ट्रीय-अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन-अध्यापन में प्रासंगिक बनाने में अपना योगदान दे। 

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प्रथम स्वतंत्रता के केंद्र में वीर कुंवर सिंह के योगदान को रेखांकित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यथित हृदय के कथन को उद्घृत करते हुए कहा कि कुंवर सिंह अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता को प्राणों से भी अधिक प्रिय समझते थे। 1857 में जब देश की स्वतंत्रता का नारा बुलंद हुआ तो कुंवर सिंह सिर पर कफ़न लपेटकर घर से निकल पड़े। वे वीर क्षत्रिय थे। उनकी रागों में उनके देशभक्त पूर्वजों का रक्त लहरा रहा था। वे हाथ में तलवार लेकर फिरंगियों से झूझने लगे। उन्होंने स्वतंत्रता के युद्ध में जो साहस दिखाया, जो त्याग किया, उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। डॉ. अशोक कुमार सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

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इस अवसर पर डॉ अशोक सिंह, दिव्या मिश्रा, डॉ शैलेश पाण्डेय, डॉ आशीष, डॉ. रामावतार, डॉ अमित, डॉ राजेन्द्र पटेल, डॉ संतोष, डॉ अनुज, डॉ हरिशंकर, डॉ अवनीश, पुनिल कुमार, डॉ धीरेन्द्र, डॉ संतोष, मनोज, श्री विकास, प्रभु, बब्बन, रजिंदर, दीनानाथ राय सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे।

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