प्रचण्ड बहुमत के बाद हमारी भी सुनो हूजूर

प्रचण्ड बहुमत के बाद हमारी भी सुनो हूजूर

रसड़ा(बलिया): आपका अपना साथी उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन जी हां सरकारी रोडवेज बसों पर यह स्लोगन लिखा होता है ।    मगर  स्थानीय बस अड्डा प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा का वर्षों से शिकार होकर  अस्तित्व बचाने के लिए आंसू बहाते हुए विकास वाली सरकार में संघर्ष कर रहा है। इसकी दुर्दशा देखकर क्षेत्रीय लोगों सहित आम यात्रियों में  जबर्दस्त आक्रोश है। गंदगी और दुर्व्यवस्था इस स्टेशन की पुरानी पंरपरा में शुमार है। वर्षों से इसकी साफ-सफाई न होने से यह बस अड्डा धीरे-धीरे जंगल का रूप धारण कर अस्तित्व खोने की दहलीज पर खड़ा  है। इस संबंध में क्षेत्रीय लोगों ने अपने विचार कुछ इस अंदाज में बयां किया। समाज सेवी अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि इस बस अड्डा से विभाग को प्रति महिना लाखों की आमदनी होती है किंतु जन विभागीय उदासीनता के चलते यह बस अड्डा अपने दुर्भाग्य पर वर्षों से आंसू बहा रहा है। समाज सेवी रमेश जी अग्रवाल ने कहा कि वर्षों से यह स्टेशन परिसर में गंदगी का अंबार व आवारा पशुओं का चारागाह बनकर रह गया है जिसके कारण  यात्री सपरिवार स्टेशन परिसर में नहीं जा पाता , पूर्व सरकार के मंत्री व वर्तमान  योगी सरकार के परिवहन मंत्री ने इस बस अड्डा के कायाकल्प का बलिया आगमन पर आश्वासन दिया था सबका साथ, सबका विकास के तहत इस सरकारी बस स्टैंड का विकास जल्द ही होगा किन्तु यह मूर्त रूप कब लेगा यह तो वक्त ही बतायेगा। सजपा के जिला अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा कि इस बस अड्डा के बदहाली के जिम्मेदारी अधिकारियों व  कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए इस बस अड्डा को आदर्श बस अड्डा बनाये जाने की मांग की ताकि यह सरकारी बस स्टेशन अपनी खोई  गरिमा को पुन: प्राप्त कर सके। चौथा स्तंभ रवि आर्य ने कहा कि यह दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि लाखों की आबादी का प्रतिनित्व करने वाला जनपद का सबसे पुराना रसड़ा तहसील क्षेत्र का बस अड्डा अपनी दुर्दशा पर बारी,बारी, सभी पार्टियां के सरकार  बनने के बाद भी स्थायी सरकार में भी  आंसू बहाने पर मजबूर है। यहां पर आलम यह कि गंदगी के कारण एक भी यात्री परिसर में जाना मुनासिब नहीं समझता जिसके कारण यह बस अड्डा धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोता चला जा रहा है।
हालांकि की अखण्ड भारत न्यूज़ ने समय समय पर  सम्बंधित अधिकारियों को बार बार खबर के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराया गया मगर अधिकारी व जनप्रतिनिधि ऐसा लगता है भीषण गर्मी में  कुंभ कर्णीय नींद में सोये है  कब तक जागेंगे हूजुर कोई बताने को तैयार नहीं। राज और नीति में भोली भाली जनता तो इस उम्मीद से अपना मतदान करतीं हैं कि इलाके में अच्छी सड़कें हों , यातायात के साधन अच्छे हों कल कारखाने हों ताकि इलाका में खुशहाली रहें।
रिपोर्ट पिन्टू सिंह

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