69000 शिक्षक भर्ती : हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, जानिएं पूरा मामला

69000 शिक्षक भर्ती : हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, जानिएं पूरा मामला

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 16 अगस्त को आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। सीजेआई ने सभी पक्षकारों से कहा कि आप लिखित नोट दाखिल करें। हम 23 सितंबर को इस पर सुनवाई करेंगे।

बता दें कि 16 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 शिक्षकों की भर्ती पर सुनवाई पर करते हुए भर्ती परीक्षा की मेरिट लिस्ट नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग को 3 महीने में नई चयन सूची जारी करनी थी। कोर्ट में शिक्षकों की भर्ती में 19 हजार सीटों पर आरक्षण घोटाला सामने आया था। ऐसे में बेंच ने आदेश दिया कि आरक्षण नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का पालन कर नई लिस्ट बनाई जाए। इससे पहले लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच भी ये मान चुकी थी कि 69,000 शिक्षकों की भर्ती में 19,000 सीटों पर आरक्षण का घोटाला हुआ था।

क्या है 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला
उत्तर प्रदेश का 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला एक बड़ा विवाद है, जो राज्य में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। इस मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए इस भर्ती का आयोजन किया। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई विवाद और कानूनी मुद्दे सामने आए।

यह भी पढ़े दुल्हन की सफल सर्जरी : स्टेज पर दूल्हे को जयमाला पहनाते समय सिरफिरे ने मारी थी गोली

कट-ऑफ मार्क्स
प्रारंभ में, 2018 में यूपी सरकार ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए न्यूनतम कट-ऑफ अंक 60% (जनरल कैटेगरी) और 55% (आरक्षित वर्ग) तय किए थे। हालांकि, परीक्षा के बाद अचानक से कट-ऑफ को 65% और 60% कर दिया गया, जिससे कई उम्मीदवार प्रभावित हुए और इस फैसले के खिलाफ उन्होंने विरोध और कानूनी लङाई शुरू कर दी।

यह भी पढ़े बलिया में भीषण एक्सीडेंट : एक व्यक्ति की मौत, बाइक छोड़ भागा चालक

परीक्षा में अनियमितताएं
परीक्षा में कई अनियमितताओं के आरोप लगाए गए, जैसे पेपर लीक, गलत मूल्यांकन, और कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिलना। कई जगहों पर परीक्षा की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए, जिसके चलते मामला कोर्ट में पहुंचा।

याचिकाएं और अदालत का हस्तक्षेप
उम्मीदवारों द्वारा कट-ऑफ और अनियमितताओं के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई। इसने भर्ती प्रक्रिया को लंबे समय तक रोके रखा। इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई की और अपनी टिप्पणियाँ दीं, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया में धीरे-धीरे प्रगति हुई।

आरक्षण और मेरिट लिस्ट में विवाद
आरक्षण नियमों को सही तरीके से लागू न करने को लेकर भी विवाद उठे। कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि मेरिट लिस्ट में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ न्याय नहीं किया गया। वहीं, कानूनी विवादों और प्रक्रिया में देरी के कारण कई उम्मीदवारों को लंबे समय तक नौकरी का इंतजार करना पड़ा। कई बार कोर्ट के आदेशों और सरकार के फैसलों के कारण भर्ती प्रक्रिया ठप रही।

Related Posts

Post Comments

Comments

Latest News

25 March Ka Rashifal : जानिएं क्या कहते हैं आपके सितारे 25 March Ka Rashifal : जानिएं क्या कहते हैं आपके सितारे
मेषपराक्रम भाव सक्रिय रहेगा। साहस बढ़ेगा और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और छोटी...
बलिया DM के आदेश पर गैस एजेंसी पर छापा, गायब मिले 1015 भरे हुए घरेलू सिलेंडर ; मैनेजर पर मुकदमा
प्रेमिका की शादी तय, वाट्सएप स्‍टेटस लगाकर फंदे पर झूला बलिया का युवक
जनगणना 2027 : बलिया में शिक्षामित्रों ने बीएसए को पत्र सौंपकर उठाई यह मांग
Video : बलिया में दो पक्षों में बवाल, एक की मौत
25 मार्च को सम्मानित होंगे बलिया के 448 हेडमास्टर, BSA ने जारी किए लिस्ट
Ballia Education : वार्षिक परीक्षा फल और अवार्ड पाकर चहक उठे मनःस्थली के बच्चे