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बेबाक साहित्य धारा

बलिया कनेक्शन : मैं लिखता हूं प्रेम, वे पढ़ते हैं घृणा

मैं लिखता हूं प्रेम वे पढ़ते हैं घृणा। उन्होंने कैसे पढ़ लिया था द्वेष जब मैंने लिखा था करुणा। हर बार क्षमा और दया उनके लिए नफरत में क्यों बदल जाती है। क्या शब्दों के मायने बदल गए हैं? अब उनके वह अर्थ नहीं होते, जो कल तक हुआ करते थे। या फिर उन्होंने तय कर लिया है कि हम …

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LOVE YOU ALL : जरूर पढ़ें यह स्टोरी, बदल जायेगी जीवन की थ्योरी

एक प्राथमिक स्कूल में अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं। वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी। उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा में आते ही हमेशा “LOVE YOU ALL” बोला करतीं थी। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं बोल रही। वह कक्षा के सभी बच्चों से एक जैसा प्यार नहीं करती थीं। कक्षा में एक ऐसा …

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उत्साह से लवरेज रहा ‘तय करों, किस ओर हो तुम’ कार्यक्रम

गाथांतर। पुरवाई पत्रिका तथा जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय साहित्यक कार्यक्रम ‘तय करो किस ओर हो तुम’ के प्रथम दिन सर्वप्रथम संकल्प संस्था बलिया द्वारा मो फैज़, गोरख पांडेय , के जनगीतों की सुर बद्ध प्रस्तुति की गयी। प्रथम सत्र में जलेस के प्रदेश के महासचिव नलिन रंजन जी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुये समकालीन …

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शायद ये जमाना तय कर दें एक दिन…

सुनो, तुम मानो या न मानो पर तुम हो मेरी जिंदगी की किताब के वो अध्याय जिसका शब्द-शब्द लिखा है मैंने पूरी निष्ठा व समर्पण से क्या और कितना के साथ तुम आज जो ढूँढ़ते हो मायने मेरे इस समर्पण के तो सुनो, मेरी ये चुप्पी एक इशारा है इस बात का कि ये तय करना शायद मेरा-तुम्हारा काम नहीं …

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हम तो उन्हीं को जितायेंगे…

हम तो उन्हीं को जितायेंगे… जो हमें कागज़ी विकास से उठाकर, वास्तविकता से रुबरु करायेंगे। ताल-तलैया युक्त सडक़ों से हटाकर, सुगम रास्तों पर ला कीचड़ भरी चप्पलों से निजात दिलायेंगे।। हम तो उन्हीं को जितायेंगे….. जो हमें ‘अबला’ सम्बोधन से सहानुभूति ना देकर, बराबरी के हक हिस्सेदारी से परिचित करायेंगे। जवानों की शहादत तथा स्त्रीलज्जा हरण पर मात्र दो पुष्प …

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Dr Janardan Rai : प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू…

बलिया। ‘प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू, हर कदम पर शुभ मुहूर्त की तरह लगता है तू, और क्या इससे ज्यादा कहूं आपके लिए, दर्द की बस्ती में राहत की तरह लगता है तू’ यह पक्ति जैसे ही शशि प्रेमदेव ने पढ़ी, खुशियों की ताली से भृगु मंदिर का वाचनालय चहक उठा। मौका था, बलिया की माटी …

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कितना जल्दी पलट जाते हो तुम…

कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! बोलते हो जब तुम एक खेमे में जाकर अच्छे अच्छे के होश उड़ा जाते हो तुम! कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! अभी कुछ दिन पहले मैने साथ देखा था जिस खुशनसीब के साथ! …

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डॉ. नामवर सिंह का बलिया से था अटूट रिश्ता : सुशील

बलिया। हिन्दी साहित्य जगत के पुरोधा एवं ख्यातिलब्ध समालोचक डॉ. नामवर सिंह के निधन की सूचना मिलते ही आचार्य पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव ओझवलिया में शोक की लहर दौड़ गयी। सांसद आदर्श गांव ओझवलिया अचानक मनहूस हो गया, क्योंकि डॉ. नामवर सिंह से ओझवलिया का रिश्ता गुरु-शिष्य का था। डॉ. नामवर सिंह हिंदी के प्रख्यात निबंधकार, समालोचक …

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नहीं रहे हिंदी साहित्य जगत के प्रखर आलोचक नामवर सिंह

लखनऊ। हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे। मंगलवार की रात 11.52 पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले दिनों नामवर सिंह दिल्ली के अपने घर में गिर गए थे जिसके बाद उनके सिर में चोट लगी और उनको एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया था। 28 जुलाई, 1926 …

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कुशीनगर हादसा: मेरे जाने से हौंसला मत खोना मां, मुझसे बिछड़ कर मत रोना मां

कुशीनगर में 13 बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर कवियों की मार्मिक रचनाएं वायरल हो रही है। एक और कविता Purvanchal 24.com के पास पहुंची है, जिसे अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। मां काश आज मैं स्कूल न जाता, शायद तुम्हे फिर से देख पाता, तेरी आवाज …

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