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बेबाक साहित्य धारा

Dr Janardan Rai : प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू…

बलिया। ‘प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू, हर कदम पर शुभ मुहूर्त की तरह लगता है तू, और क्या इससे ज्यादा कहूं आपके लिए, दर्द की बस्ती में राहत की तरह लगता है तू’ यह पक्ति जैसे ही शशि प्रेमदेव ने पढ़ी, खुशियों की ताली से भृगु मंदिर का वाचनालय चहक उठा। मौका था, बलिया की माटी …

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कितना जल्दी पलट जाते हो तुम…

कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! बोलते हो जब तुम एक खेमे में जाकर अच्छे अच्छे के होश उड़ा जाते हो तुम! कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! अभी कुछ दिन पहले मैने साथ देखा था जिस खुशनसीब के साथ! …

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डॉ. नामवर सिंह का बलिया से था अटूट रिश्ता : सुशील

बलिया। हिन्दी साहित्य जगत के पुरोधा एवं ख्यातिलब्ध समालोचक डॉ. नामवर सिंह के निधन की सूचना मिलते ही आचार्य पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव ओझवलिया में शोक की लहर दौड़ गयी। सांसद आदर्श गांव ओझवलिया अचानक मनहूस हो गया, क्योंकि डॉ. नामवर सिंह से ओझवलिया का रिश्ता गुरु-शिष्य का था। डॉ. नामवर सिंह हिंदी के प्रख्यात निबंधकार, समालोचक …

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नहीं रहे हिंदी साहित्य जगत के प्रखर आलोचक नामवर सिंह

लखनऊ। हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे। मंगलवार की रात 11.52 पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले दिनों नामवर सिंह दिल्ली के अपने घर में गिर गए थे जिसके बाद उनके सिर में चोट लगी और उनको एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया था। 28 जुलाई, 1926 …

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कुशीनगर हादसा: मेरे जाने से हौंसला मत खोना मां, मुझसे बिछड़ कर मत रोना मां

कुशीनगर में 13 बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर कवियों की मार्मिक रचनाएं वायरल हो रही है। एक और कविता Purvanchal 24.com के पास पहुंची है, जिसे अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। मां काश आज मैं स्कूल न जाता, शायद तुम्हे फिर से देख पाता, तेरी आवाज …

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‘संकल्प’ की डायरी में यह बात लिख गये थे केदार नाथ सिंह

बलिया। संकल्प के रंगकर्मियों से गहरा लगाव था प्रो. केदार नाथ सिंह का। 2009 अपने बलिया आगमन के दौरान संकल्प के मिश्र नेवरी स्थित कार्यालय पर आये। रंगकर्मियों से मिले। बलिया में रंग मंच की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। संकल्प के विजिटिंग डायरी पर लीखे कि “संकल्प संस्था को और उसकी बहुविध गतिविधियों की रपट देखी …

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‘ढ़िबरी’ की रौशनी में बसंती बहार, परम्परा को ‘जिन्दा’ करने जुटा गांव-जवार

बैरिया, बलिया। विलुप्त हो रही परम्परा का जीवन्त रुप धरातल पर बुधवार को तब दिखा, जब ढिबरी फाउन्डेशन ने गऊंझी फगुआ एवं होली गीत के लिए बैरिया जीप स्टैड में एक नया मंच दिया। परम्परा के लोप होने से चाहकर भी एक युवक भाग नही ले सके, क्योंकि परम्परागत फगुआ गायन उनके बुते की बाहर की बात थी। वही कई …

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‘जज़्बातों का खून हुआ है, कैसी आयी होली है…’ शिक्षा मित्रों का दर्द बयां करती कविता वायरल

छटपटाहट अरमानों का गला दबा है, छोड़ चला हमजोली है। जज़्बातों का खून हुआ है, कैसी आयी होली है। बिंदी छूटी चूड़ी टूटी, रूठी पैर महावर है। फूट-फूट के बच्चे रोते,दर-दर खानी ठोकर है। किस गुनाह की सजा मिली है,कोई कुछ तो बतलाये। पढ़ना लिखना इन बच्चों का,कैसे होगा समझाये। घर के आँगन सजती थी जो, रोती आज रँगोली है। …

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‘का मतलब है डिगरी-डिगरा, चलौ पकौड़ा बेंचा जाय’

पकौड़ा को लेकर इस समय देश भर में हो-हल्ला मचा है। इस बीच, ‘चलौ पकौड़ा बेंचा जाय…’ शीर्षक से एक कविता सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। चलौ पकौड़ा बेंचा जाय… चलौ पकौड़ा बेंचा जाय, चलौ पकौड़ा बेंचा जाय ॥ पढै-लिखै कै कौन जरूरत, रोजगार कै सुन्दर सूरत, दुइ सौ रोज कमावा जाय, दिन भर मौज मनावा जाय, …

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