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बेबाक साहित्य धारा

उपेक्षा की टीस संग गांव में याद किये गये पद्मश्री हजारी प्रसाद

बलिया। हिन्दी साहित्य-जगत् में पूरी दुनिया का पथ-प्रदर्शक करने वाले मूर्धन्य विद्वान एवं कालजयी साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की 113वीं जयंती सोमवार को उनके पैतृक गांव ओझवलिया में सादगी से मनाई गई। प्रबुद्धजनों ने आचार्य द्विवेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। आचार्य पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता साहित्यकार …

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रक्षाबंधन का मजा दोगुना कर देंगे प्यार से भरे ये मैसेज

बलिया। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन ही रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। भाई-बहन के स्नेह को दर्शाने वाला ये त्योहार इस बार बहुत ही खास होगा, क्योंकि इसमें भद्रकाल का साया नहीं पड़ रहा है। जिससे 12 घंटों तक शुभ मुहूर्त रहेगा। मतलब आप कभी भी राखी बंधवा सकते हैं। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी …

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‘संकल्प’ के आंगन सजीं साहित्यिक पाठशाला, प्रेमचंद रहे केन्द्र विन्दु और…

बलिया। प्रोफेसर यशवंत सिंह ने प्रेमचंद बीसवीं सदी के प्रतिनिधि भारतीय कथाकार है। यह भारतीय जनता के मुक्ति संग्राम के सबसे बड़े चितेरे हैं। संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर संकल्प के मिश्र नेवरी स्थित कार्यलय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रोफेसर यशवंत सिंह ने कहा कि उनका साहित्य सामंतवादी पूंजीवादी तंत्र …

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बलिया कनेक्शन : मैं लिखता हूं प्रेम, वे पढ़ते हैं घृणा

मैं लिखता हूं प्रेम वे पढ़ते हैं घृणा। उन्होंने कैसे पढ़ लिया था द्वेष जब मैंने लिखा था करुणा। हर बार क्षमा और दया उनके लिए नफरत में क्यों बदल जाती है। क्या शब्दों के मायने बदल गए हैं? अब उनके वह अर्थ नहीं होते, जो कल तक हुआ करते थे। या फिर उन्होंने तय कर लिया है कि हम …

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LOVE YOU ALL : जरूर पढ़ें यह स्टोरी, बदल जायेगी जीवन की थ्योरी

एक प्राथमिक स्कूल में अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं। वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी। उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा में आते ही हमेशा “LOVE YOU ALL” बोला करतीं थी। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं बोल रही। वह कक्षा के सभी बच्चों से एक जैसा प्यार नहीं करती थीं। कक्षा में एक ऐसा …

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उत्साह से लवरेज रहा ‘तय करों, किस ओर हो तुम’ कार्यक्रम

गाथांतर। पुरवाई पत्रिका तथा जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय साहित्यक कार्यक्रम ‘तय करो किस ओर हो तुम’ के प्रथम दिन सर्वप्रथम संकल्प संस्था बलिया द्वारा मो फैज़, गोरख पांडेय , के जनगीतों की सुर बद्ध प्रस्तुति की गयी। प्रथम सत्र में जलेस के प्रदेश के महासचिव नलिन रंजन जी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुये समकालीन …

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शायद ये जमाना तय कर दें एक दिन…

सुनो, तुम मानो या न मानो पर तुम हो मेरी जिंदगी की किताब के वो अध्याय जिसका शब्द-शब्द लिखा है मैंने पूरी निष्ठा व समर्पण से क्या और कितना के साथ तुम आज जो ढूँढ़ते हो मायने मेरे इस समर्पण के तो सुनो, मेरी ये चुप्पी एक इशारा है इस बात का कि ये तय करना शायद मेरा-तुम्हारा काम नहीं …

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हम तो उन्हीं को जितायेंगे…

हम तो उन्हीं को जितायेंगे… जो हमें कागज़ी विकास से उठाकर, वास्तविकता से रुबरु करायेंगे। ताल-तलैया युक्त सडक़ों से हटाकर, सुगम रास्तों पर ला कीचड़ भरी चप्पलों से निजात दिलायेंगे।। हम तो उन्हीं को जितायेंगे….. जो हमें ‘अबला’ सम्बोधन से सहानुभूति ना देकर, बराबरी के हक हिस्सेदारी से परिचित करायेंगे। जवानों की शहादत तथा स्त्रीलज्जा हरण पर मात्र दो पुष्प …

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Dr Janardan Rai : प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू…

बलिया। ‘प्यार की अनमोल दौलत की तरह लगता है तू, हर कदम पर शुभ मुहूर्त की तरह लगता है तू, और क्या इससे ज्यादा कहूं आपके लिए, दर्द की बस्ती में राहत की तरह लगता है तू’ यह पक्ति जैसे ही शशि प्रेमदेव ने पढ़ी, खुशियों की ताली से भृगु मंदिर का वाचनालय चहक उठा। मौका था, बलिया की माटी …

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कितना जल्दी पलट जाते हो तुम…

कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! बोलते हो जब तुम एक खेमे में जाकर अच्छे अच्छे के होश उड़ा जाते हो तुम! कितना जल्दी पलट जाते हो तुम, आज इस थाली कल उस थाली सरक जाते हो तुम! अभी कुछ दिन पहले मैने साथ देखा था जिस खुशनसीब के साथ! …

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