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सिकन्दरपुर पहुंच बलिया सांसद ने दिया बड़ा संदेश


अजीत पाठक की खास रिपोर्ट
सिकंदरपुर, बलिया। देर लगी आने में तुम को, शुक्र है फिर भी आए तो। आस ने दिल का साथ न छोड़ा, वैसे हम घबराए तो। किसी हिंदी फिल्म का यह गाना गुरुवार को सिकंदरपुर में अक्षरश: सत्य साबित हुआ। मौका था युवा दिवस पर जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में आयोजित विचार गोष्ठी का। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राजधारी सिंह के नेतृत्व में आयोजित उक्त कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद बलिया वीरेंद्र सिंह मस्त को भी शिरकत करना था। 

पर एक आवश्यक कार्य से गाजीपुर जनपद के भांवरकोल चले जाने की वजह से वे ससमय उपस्थित नहीं हो पाए। लेकिन पूरे कार्यक्रम के दौरान जो एक बात देखने को मिली वह चर्चा ए ख़ास रही। भले ही सांसद गाजीपुर में थे, लेकिन उनका दिल गुलाबो की नगरी में ही था। एक तरफ जहां मेजबान अपने मेहमान की मेजबानी के लिए बेकरार दिखे तो दूसरी ओर मेहमान भी कार्यक्रम का पल पल अपडेट लेते रहे। 

बहरहाल कार्यक्रम के समाप्त होने के काफी देर बाद आयोजन स्थल पर पहुंचकर सांसद ने बड़ा संदेश दे दिया। सांसद ने यह साबित कर दिया कि जिनका स्थान दिल में हो उनके लिए समय कभी बेसमय नही हो सकता। हो भी क्यों न, सांसद और पूर्व मंत्री के मधुर संबंधों की चर्चा राजनीतिक गलियारे में बड़ी शिद्दत के साथ की जाती है। राजनीतिक संघर्षों के दौरान एक दूसरे के साथी रहे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दिखा दिया कि अपनों के लिए कभी और किसी वक्त, कहीं भी दस्तक दिया जा सकता है। 

उधर, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपने कुछ निकट सहयोगियों के साथ गुफ्तगू में लीन पूर्व मंत्री ने अपने बीच जब अपने शुभेच्छु साथी को पाया तो ऊर्जा से लबरेज हो गये। एक पल में ही हाड़ कंपाती ठंड काफुर हो गई। पूरे गर्मजोशी के साथ मेजबान ने अपने मेहमान का स्वागत किया और काफी देर तक राजनीतिक आबोहवा पर चर्चा करते रहे। करीब 45 मिनट के मिलन के बाद सांसद जाते जाते ये संदेश दे भी गए-

नादानी और मजबूरी में यारो कुछ तो फ़र्क़ करो,
इक बे-बस इंसान करे क्या टूट के दिल आ जाए तो।

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