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पुलिसिया इकबाल को चुनौती देने वाले दो बदमाशों यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में किया ढेर, बिहार में था सगे भाईयों का आतंक

वाराणसी। पुलिसिया इकबाल को चुनौती देने वाले दो बदमाशों को क्राइम ब्रांच ने बड़ागांव थाना क्षेत्र के भेलखा गांव में रिंग रोड के समीप मुठभेड़ में मार गिराया। इस दौरान कई राउंड फायरिंग हुई। हालांकि उनका तीसरा साथी भागने में कामयाब रहा। मुठभेड़ में क्राइम ब्रांच का एक सिपाही भी घायल हुआ है। 

पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि गोली लगने से घायल बदमाशों को अस्पताल में मृत घोषित किया गया। उनकी शिनाख्त रजनीश उर्फ बऊआ सिंह (निवासी गोलवा जिला समस्तीपुर, बिहार) और उसके सगे भाई मनीष के तौर पर हुई है। तीसरा फरार आरोपी इनका भाई लल्लन है। यह तीनों अत्यंत शातिर हत्यारे एवं लुटेरे हैं। वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने मारे गए बदमाशों की डिटेल्ड क्रिमिनल हिस्ट्री बिहार पुलिस से मांगी है। 

तीनों हाल ही में पटना जेल से भागे थे। बिहार पुलिस को इनकी सरगर्मी से तलाश थी। पुलिस ने बदमाशों के पास से एक नौ एमएम पिस्टल और एक 32 बोर का पिस्टल, बाइक, मोबाइल फोन और जरूरी कागजात बरामद किए हैं। यह पिस्टल वही है, जिसे लक्सा थाने में तैनात दरोगा अजय कुमार पर कुछ दिन पहले ही जानलेवा हमला कर लूटा था। इसके बाद से ही पुलिस को बदमाशों की तलाश थी। 

वाराणसी के दरेखू में 09 नवंबर की शाम लक्सा थाने में तैनात दरोगा अजय यादव पर तीन बदमाशों ने हमला बोला था। गोली मारकर सरकारी पिस्टल लूट ली थी। कमिश्नरेट विस्तार के बाद इस घटना ने महकमे को हिलाकर रख दिया था। बदमाशों की गिरफ्तारी और सरकारी पिस्टल की बरामदगी करना भी पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि दरोगा अजय यादव को गोली मार कर पिस्टल लूटने की घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों की तलाश में पुलिस टीमें लगातार लगी हुई थीं। 

सोमवार तड़के सर्विलांस की मदद से पता लगा कि घटना में वांछित तीन बदमाश भेलखा गांव के पास रिंग रोड से गुजरने वाले हैं। इस पर कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच और बड़ागांव थाने की पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों बदमाशों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखते ही बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो बदमाशों को गोली लगी। बदमाशों की गोली से क्राइम ब्रांच के सिपाही शिव बाबू भी घायल हुए, जबकि एक बदमाश भाग निकला। 

पुलिस सभी घायलों को जिला अस्पताल लेकर गई। अस्पताल में दोनों बदमाशों को चिकित्सको ने मृत घोषित कर दिया। सिपाही को भर्ती किया गया। घटनास्थल से भाग निकले एक बदमाश की तलाश के लिए पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं। मुठभेड़ की जानकारी के बाद फील्ड यूनिट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पहुंचे। बदमाशों के पास से बरामद हुई नाइन एमम पिस्टल के मिलान की कार्रवाई के लिए उसे मुख्य आरमोरर के पास भेजा गया। यह वही पिस्टल है जो दरोगा से लूटी गई थी।

मुठभेड़ में ढेर दोनों बदमाशों का रहा है बड़ा आपराधिक इतिहास

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुठभेड़ में ढेर दोनों बदमाशों का बड़ा आपराधिक इतिहास रहा है। पिछले एक दशक से बिहार के समस्तीपुर समेत अन्य जिलों में इनकी दहशत थी। चारों भाई रजनीश, मनीष और लल्लन, राजेश का आतंक पूरे बिहार में था। पुलिसकर्मियों की दिनदहाड़े हत्या कर असलहा लूट के साथ ही गिरोह के संग बैंक डकैती और अन्य जघन्य वारदात को अंजाम देना ही इनका काम था। तीन माह पूर्व 9 सितंबर 2022 को पटना बाढ़ जिला जज की कोर्ट से पेशी के दौरान बाथरूम की दीवार फांदकर फरार हुए थे। 9 सितंबर 2022 को पटना बाढ़ जिला जज की कोर्ट से पेशी के दौरान बाथरूम की दीवार फांदकर बदमाश रजनीश, मनीष और लल्लन फरार हुए थे।

दोनों की आपराधिक हिस्ट्री कमिश्नरेट पुलिस ने खंगाली तो सामने आया कि दोनों भाइयों पर पहला मुकदमा वर्ष 2011 में लूट का समस्तीपुर के मोहद्दीपुर थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ में ढेर रजनीश, मनीष के दो अन्य भाई लल्लन और राजेश भी आपराधिक कृत्यों में लिप्त हैं। पिता शिवशंकर भी बेटों के मन को बढ़ाता रहा। इनका एक गिरोह बिहार में है। चारों भाइयों ने छह मार्च 2017 को पटना के बेलछी थाना के बाघाटिलहा गांव के पास पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से दिनदहाड़े 60 लाख रुपये लूट लिए थे। इस दौरान लूट की घटना को अंजाम देने के दौरान बैंक के गार्ड योगेश्वर पासवान, सुरेश सिंह और वाहन चालक अजीत यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने बदमाशों से 45 लाख रुपये बरामद किया था। एक साल पूर्व दोनों बदमाशों ने वर्ष 2016 में बिहार में दो दरोगा की हत्या और एक जमादार को गोली मारकर तीन सरकारी पिस्टल और एक रिवाल्वर लूट ली थी। 

पुलिस आयुक्त के अनुसार बदमाशों के कब्जे से बरामद मोबाइल की सीडीआर खंगाली जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वाराणसी में और कौन लोग इनके संपर्क में थे। पनाह देने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। दरोगा अजय यादव की हत्या का प्रयास और सर्विस पिस्टल लूट की घटना ने वाराणसी के साथ ही यूपी पुलिस को भी हिला दिया था। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने दस दरोगा की एसआईटी गठित की। सर्विलांस प्रभारी इंस्पेक्टर अंजनी पांडेय और क्राइम ब्रांच की टीम लगातार 13 दिन तक सुरागकशी करती रही। कमिश्नरेट पुलिस के लिए यह घटना चुनौती बनी थी। आखिरकार 13 दिन के अंदर पुलिस ने आतंक का अंत कर दिया।

रोहनिया थाना अंतर्गत जगतपुर दरेखू गांव में 9 नवंबर की शाम दरोगा अजय यादव को गोली मार कर बदमाशों ने सर्विस पिस्टल, दस कारतूस, मोबाइल, पर्स लूट ली थी। फायरिंग में दरोगा को सीने के दाहिने हिस्से में गोली लगी थी। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर रोहनिया इंस्पेक्टर विमल कुमार मिश्र और मोहनसराय चौकी इंचार्ज रजनीश त्रिपाठी को पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने निलंबित कर दिया था। अलसुबह के समय हरहुआ रिंग रोड किनारे अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से आसपास के ग्रामीण सहम गए। अपने गंतव्य को जाने वाले राहगीर भी जहां-तहां ठहर गए। अचानक पुलिस की भारी फोर्स और गाड़ियों को देख बहुत देर तक ग्रामीण कुछ समझ नहीं सके। बाद में मालूम चला कि पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई है।


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