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जवान का शव पहुंचते ही रो पड़ा बलिया का यह गांव, नादान बेटे ने दी मुखाग्नि


सुरेश मिश्र/हरेराम यादव
रामगढ़, बलिया। रेवती थाना क्षेत्र के नवकागांव निवासी सीआरपीएफ जवान संजीत कुमार सिंह का शव पहुंचते ही कोहराम मच गया। दोनों पुत्र अपने पिता के शव से लिपट कर रोने लगे। पत्नी माला सिंह बेसुध पड़ी थी। हर कोई बच्चों व परिवार के सदस्यों को ढाढस बंधा रहा था। जवान का अंतिम संस्कार सीआरपीएफ 122वीं बटालियन दिल्ली के कंपनी कमांडर अनुपम सिंह के नेतृत्व में गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। 

बता दें कि संजीत कुमार सिंह (40) पुत्र हरिद्वार सिंह दिल्ली के 122 वी बटालियन सीआरपीएफ में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान इनकी तबीयत खराब हो गई। साथियों ने दिल्ली के एशियन अस्पताल फरीदाबाद में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान बुधवार की दोपहर में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी सूचना अधिकारियों ने संजीत के परिजनों को दी तो कोहराम मच गया। 

संजीत की मौत की सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली पहुंच गए। सीआरपीएफ जवान संजीत का शव अपने वाहन से लेकर गुरुवार को रेवती थाना क्षेत्र के नवकागांव में पहुंचे तो कोहराम मच गया।संजीत के बड़े पुत्र कृष्ण कांत सिंह ने जैसे ही अपने पिता को गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर प्रधान प्रतिनिधि रवि सिंह, गुप्तेश्वर सिंह, अनिल सिंह, बंटी सिंह, सूरज कुमार सिंह, जयप्रकाश सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।


नावालिग बेटे ने दी मुखाग्नि

संजीत कुमार सिंह वर्ष 2002 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्ष 2003 में संजीत की शादी जयप्रकाश नगर निवासी रास बिहारी सिंह की पुत्री माला सिंह से हुई थी। संजीत कुमार के 2 पुत्र किशन कांत सिंह (15) व सूर्यकांत सिंह (9) है। संजीत के बड़े पुत्र कृष्ण कांत सिंह ने जैसे ही अपने पिता को गंगा नदी के पचरुखिया घाट पर मुखाग्नि दी। कोई अपने आंख के आंसू को नहीं रोक पाया। वही पति के मौत के बाद माला सिंह भी अपना सुध बुध खो चुकी है।

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