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अव्यवस्था की भेंट चढ़ी स्टेट खो-खो प्रतियोगिता : भोजन-पानी को तरसे खिलाड़ी, फर्श पर सोए-खेत में गए शौच ; महिला प्लेयर को लगा करंट

बस्ती। खिलाड़ियों को ऊंची उड़ान देने की दिशा में सरकार की पहल को जिले के जिम्मेदारों ने पलीता लगा दिया। कप्तानगंज ब्लॉक में चार दिन चली स्टेट खो-खो प्रतियोगिता में अन्य जनपदों से आये खिलाड़ियों को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें न सिर्फ फर्श पर सोना पड़ा, बल्कि शौच के लिए खेत में जाना पड़ा। प्रदेश के छह चयनकर्ताओं ने राज्य विद्यालयीय क्रीड़ा संस्थान अयोध्या, संयुक्त शिक्षा निदेशक बस्ती मंडल से इसकी शिकायत करते हुए अव्यवस्थाओं के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को जिम्मेदार ठहराया है। 

16 से 19 नवंबर तक कप्तानगंज के श्री रामप्यारे चौधरी इंटर कालेज नकटीदेई बुजुर्ग रेहरवा में 66वीं राज्य स्तरीय माध्यमिक विद्यालयीय खो-खो प्रतियोगिता हुई। इसमें 17 मंडलों की 75 बालक-बालिका टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रदेश टीम के चयनकर्ताओं में वाराणसी की डॉ. सुधारानी तिवारी, तृप्ति अग्रवाल, बलिया की कनक चक्रधर, फर्रुखाबाद के राजीव कुमार, मिर्जापुर के विजय कुमार पटेल, एटा के धर्मेन्द्र पाल सिंह व बलिया के विनोद कुमार सिंह ने डॉ. भीमराव आंबेडकर राज्य विद्यालयीय क्रीडा संस्थान अयोध्या, उत्तर प्रदेश के प्राचार्य को भेजे पत्र में अव्यवस्थाओं का हवाला दिया है। इसके मुताबिक शहर मुख्यालय से 15 किमी दूर ग्रामीण क्षेत्र स्थित इस खेल के मैदान पर सभी चयनकर्ता 16 नवंबर को सुबह सात बजे से मौजूद रहे। टीम चयन के लिए जरूरी खिलाड़ियों का पात्रता प्रमाण पत्र व मैच शेड्यूल के साथ मैच स्कोर शीट 19 नवंबर की दोपहर तक आयोजक व क्षेत्रीय अधिकारियों ने नहीं उपलब्ध कराई। अपने प्रयास से खिलाड़ियों के नाम व जनपद पूछकर प्रदेशस्तरीय टीम का चयन किया। यहां व्यवस्था की बदहाली की शिकायत महानिदेशक से की गई है। 

राज्यस्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में सामने यह आई शिकायतें 

-शहीद सत्यवान सिंह स्टेडियम में होने वाली प्रतियोगिता को कप्तानगंज में कराने पर उठे सवाल।
-राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भूखे प्यासे 4 दिन तक खेलते रहे खिलाड़ी, किसी ने नहीं रखा ख्याल।
-DIOS के चलते राज्य स्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में हुई दुर्व्यवस्था से बदनाम हुआ बस्ती।
-चार दिवसीय प्रतियोगिता में महिला खिलाडियों को शौच के लिए खेतों में जाने के लिए होना पड़ा विवश।
-900 से अधिक खिलाड़ियों को खाने और मूलभूत सुविधाओं के आभाव में जैसे-तैसे हुई प्रतियोगिता।
-चयनकर्ता के रूप में आये हुए बलिया के विनोद कुमार सिंह, कानपुर के होशियार सिंह, अलीगढ़ से सतेंद्र यादव ने महिला खिलाड़ियों की अव्यवस्था पर जताई थी आपत्ति। 


-मुख्यालय पर आयोजित होती तो कम से कम खिलाड़ियों को नहीं होता भोजन का कष्ट।
-बालक-बालिकाओं की टीम को सर्द रात में फर्श पर बिना गद्दे के सोना पड़ा।
-शौचालय का नहीं था इंतजाम, खिलाड़ियों को रात में भी खेतों में जाना पड़ा।
-खेल मैदान पर भी था पानी और शौचालय का अभाव, परेशान रहे खिलाड़ी।
-भोजन और नाश्ते के लिए खिलाड़ी और कोच भटकते देखे गए।
-हाईवे के किनारे बाउंड होने के चलते लगातार बनी रही हादसे की आशंका।
-स्टिकर लगाकर वितरित किए गए प्रमाण पत्र, आयोजन तिथि छप गई थी गलत।
-स्टेट सेलेक्टरों को नहीं मिला खिलाड़ियों का पात्रता प्रमाण पत्र व मैच शेड्यूल

महिला खिलाड़ी करंट से झुलसी

प्रतियोगिता में शामिल गोरखपुर सहजनवा क्षेत्र की रहने वाली बालिका खिलाड़ी आयशा खातून पुत्री आजम अली नल में उतरे करंट से झुलस गई। साथी खिलाड़ियों ने उसे सीएचसी कप्तानगंज पहुंचाया। जानकारी होने पर डीआईओएस डीएस यादव भी सीएचसी कप्तानगंज पहुंचकर खिलाड़ी के इलाज संबंधी जानकारी ली। देर शाम आयशा खातून की हालत में सुधार होने पर उसे डिस्चार्ज किया गया। 

खिलाड़ियों ने हाईवे के ढाबों पर खाया खाना

आगरा मंडल, मुरादाबाद सहित कई मंडल की टीमों में शामिल खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें शौच के लिए खेत में जाना पड़ा। भोजन के लिए खेल मैदान से चार किलोमीटर दूर हाईवे के ढ़ाबों पर जाना पड़ा। आगरा, गाजियाबाद, नोएडा की महिला खिलाड़ियों ने भी तमाम शिकायतें की है। वहीं, खेल आयोजक सचिव केके चौधरी का कहना है कि विभाग से जो फंड मिला था, उससे बेहतर व्यवस्था करने का प्रयास किया गया।

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