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पर्यावरण की पिच पर बलिया के शिक्षक शैलेंद्र ने लगाया आठवां शतक

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में तैनात शिक्षक शैलेंद्र का प्रकृति प्रेम अनूठा है। शैलेंद्र को हरियाली से इतना गहरा लगाव है कि वे यत्र-तत्र सर्वत्र स्थान दिखा नहीं कि वहां पौधरोपण कर प्रकृति को उपहार देने में जुट जाते हैं। उनका यह कारवां यहीं नही थमता। अपने स्तर से वे आमजन को प्रकृति व पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करते रहते हैं। अपनी विधा के प्रति समर्पित उक्त शिक्षक का प्रकृति प्रेम का यह जज्बा लोगों के लिए प्रेरणादायी भी है।

नगरा ब्लाक में एआरपी के पद पर कार्यरत सहादतपुरा मऊ निवासी शिक्षक शैलेन्द्र ने पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन हेतु 5 सितंबर 2020 (शिक्षक दिवस) को प्रतिदिन एक पौधरोपण करने का संकल्प लिया था, जो आज भी बदस्तूर है। बुधवार को 800वां पौध रोपित कर शैलेन्द्र ने एक अनूठा इतिहास कायम किया। उनके समर्पण का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि वे खुद की कमाई से पौधा खरीद कर प्रतिदिन या तो उसे उचित स्थान देते हैं या फिर किसी सुयोग्य को समर्पित कर उसे रोपित करा देते हैं। इस नेक कार्य के लिए जिला एवं राष्ट्रीय स्तर के कई मंच से शैलेन्द्र को सम्मानित भी किया जा चुका है। 

बता दें कि शैलेंद्र ने अभियान का 800वां पौधा कम्पोजिट विद्यालय केसेसर पर बच्चों के साथ लगाया। कहा वैश्विक ताप वृद्धि, जलवायु परिवर्तन जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना करने में सरकार के साथ आमजन की सहभागिता होनी चाहिए। हमें अपने जीवन शैली में परिवर्तन करना होगा, अन्यथा प्रकृति अपना प्रभाव दिखाने से पीछे नही रहेगी। जीडीपी की तरह जीईपी, विकास परियोजनाये पर्यावरणीय मूल्यों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। शैलेंद्र ने बताया कि यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।


पदयात्रा, पर्यावरण संदेश साइकिल यात्रा निकाल चुके है शैलेंद्र

बताते चलें शैलेंद्र व उनकी टीम द्वारा जून 2022 में मऊ से वाराणसी तमसा नदी की स्वच्छता, रिवरफ्रंट पार्क हेतु पदयात्रा, गांधी जयंती पर मऊ से लुंबिनी नेपाल तक गांधी पर्यावरण संदेश साइकिल यात्रा भी कर चुकी है। उक्त कार्यक्रम में शिव कुमार उपाध्याय, इकरार अंजुम, सदाफल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

महीने में ढाई से तीन हजार रुपये पर्यावरण के नाम

नगरा में तैनात शिक्षक शैलेन्द्र मऊ स्थित अपने घर से ही प्रतिदिन ड्यूटी आते-जाते हैं। रास्ते में मऊ-बलिया मोड़ के पास सिकटिया ओवरब्रिज के नीचे स्थित नर्सरी से रोजाना एक या दो पौधे लेकर स्कूल आते हैं। कभी-कभी एक साथ 8-10 पौधे भी खरीदकर रख लेते हैं। शैलेन्द्र के अनुसार एक माह के ढाई से तीन हजार रुपये पर्यावरण के नाम पर खर्च करना सुकून देता है। 

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