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बलिया में श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ : कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का जनसमुंद्र, भगवान इंद्र ने किया भक्तों का अभिषेक ; देखें फोटो और Video


दुबहड़, बलिया। मनीषी संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज द्वारा आयोजित चतुर्मास यज्ञ सह श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की ऐतिहासिक कलश यात्रा मंगलवार को निकली, जिसमें श्रद्घालुओं की आस्था का जनसमुंद्र उमड़ पड़ा। यहां श्रद्घालुओं का 'अभिषेक' भगवान इंद्र ने किया।

जनेश्वर मिश्र सेतु से सटे एनएच 31 से दक्षिण गंगा किनारे आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की कलश यात्रा यज्ञ स्थल से एनएच 31 होते हुए भृगुआश्रम, रेलवे स्टेशन, शहीद चौक, हनुमानगढ़ी मंदिर होते हुए बिचला घाट स्थित शनिचरी मंदिर से रिंग बांध के रास्ते मिश्र नेवरी, जमुआ, बंधुचक, नगवा से जनाड़ी चौराहा होते हुए जनेश्वर मिश्रा सेतु के निकट गंगा घाट पर लाखों भक्तों ने जलभरी की। जलभरी के पश्चात कलश यात्रा पुनः यज्ञ स्थल पर पहुंची। 

कई किलोमीटर लम्बी कलश यात्रा में आस्था का जनसमुंद्र इस कदर उमड़ा था कि यज्ञ स्थल से गंगा घाट तक श्रीमन्ननारायण, हर हर महादेव, जय श्रीराम, बजरंग बली और पूज्य जीयर स्वामी जी का जयकारा गूंजता रहा। भगवान इंद्र की झमाझम के बीच कलश यात्रा रूट श्रद्धालुओं से पटा रहा। हाथ में कलश और जुबां पर प्रभु का नाम... की अलौकिकता देखते ही बन रही थी। हाथी, ऊंट, घोड़े तथा विभिन्न तरह के बैंड बाजे आदि कलश जल यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। 



कलश जल यात्रा 12:00 बजे से निर्धारित था, लेकिन अत्यधिक भीड़ देखते हुए 11:00 बजे से ही श्रद्धालु कलश लेकर चलना शुरू कर दिए। यज्ञ स्थल से शहर होते हुए गंगा घाट पुन: यज्ञ स्थल की दूरी लगभग 24 किलोमीटर में लगभग 16 किलोमीटर तक मूसलाधार वर्षा के बीच श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी होने के कारण संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं विहंगम प्रतीत हो रहा था। 

कलश जल यात्रा प्रारंभ होते ही झमाझम बारिश होने लगी। लेकिन झमाझम बारिश के बीच भी श्रद्धालु गंगा घाट की तरफ दौड़ते-भागते जा रहे थे। मानो इंद्रदेव भी श्रद्धालुओं के स्वागत में अपना कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे। जल कलश शोभायात्रा में एसडीएम सदर, सीओ सिटी प्रीति त्रिपाठी सहित दुबहड़ थाना पुलिस के अतिरिक्त कई थानों की फोर्स चप्पे-चप्पे पर तैनात थी। एनएच 31 सहित शहर तथा रिंग बांध पर बिहार झारखंड तथा बलिया जनपद के क्षेत्रीय स्वयंसेवी संस्थाएं श्रद्धालुओं को बीच-बीच में स्टाल लगाकर शरबत-पानी तथा जलपान आदि करा रहे थे। 

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