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प्रमोशन के लिए शिक्षकों का TET पास होना जरूरी

नई दिल्ली। मद्रास उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के प्रमोशन पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बीटी सहायकों के प्रमोशन के लिए काउंसलिंग की नई अधिसूचना जल्द से जल्द जारी करने का निर्देश दिया है। यही नहीं, प्रमोशन की श्रेणी में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की न्यूनतम पात्रता मानदंड रखने वाले शिक्षक ही इसमें शामिल हो।

जस्टिस डी कृष्ण कुमार ने आर शक्तिवेल की एक याचिका को स्वीकार करते हुए और वी वनजा एवं 40 अन्य की याचिका को खारिज करते हुए यह निर्देश दिया है। शक्तिवेल ने इस साल 30 जून को स्कूल शिक्षा आयुक्त और निदेशक के आदेश, जिसमें अवैध रूप से अयोग्य व्यक्तियों से पदोन्नति करने की छूट, को रद्द करने और उन्हें केवल टीईटी उत्तीर्ण उम्मीदवारों को ही पदोन्नति व नियुक्ति देने का निर्देश देने की मांग की थी। 

वहीं, वनजा और 40 अन्य की अन्य याचिका में इस साल 11 जुलाई के एक आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, क्योंकि इसने 14 और 15 जुलाई को माध्यमिक ग्रेड शिक्षक के पद से बीटी सहायक के पद के लिए होने वाले प्रमोशन काउंसलिंग को स्थगित कर दिया था। इसने अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर काउंसलिंग आयोजित करने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।  

कोर्ट ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE ACT) की धारा 23 (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत शैक्षणिक प्राधिकरण एनसीटीई पहली कक्षा से 8वीं तक शिक्षकों की भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करता है। इससे अधिनियम की धारा 23 में स्पष्ट है कि एक शिक्षक, जिसके पास अधिनियम के प्रारंभ में न्यूनतम योग्यता अर्थात टीईटी में उत्तीर्ण नहीं है, उसे पांच वर्ष के भीतर टीईटी क्वालिफाई कर लेना चाहिए। आरटीई अधिनियम 2009 के तहत पहले से नियुक्त किए गए उम्मीदवारों को टीईटी पास करने के लिए शुरू में पांच साल और एक अप्रैल 2015 से चार साल का अतिरिक्त समय दिया गया है। इसलिए इसमें समझौता करने की कोई गुंजाइंश नहीं है।

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