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बलिया में महारुद्र यज्ञ : उड़िया बाबा के आशीर्वचन से सजीं काव्य पीठ, कवियों ने पढ़ी एक से बढ़कर एक रचनाएं

बलिया। श्री जंगली बाबा धाम गड़वार के प्रांगण में गतिमान महारुद्र यज्ञ के सांस्कृतिक मंच पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें में कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं द्वारा वातावरण को भावोद्वेलित कर दिया। आध्यात्मिक, सामाजिक, पर्यावरण और सामान्य मनोरंजन विषयक रचनाओं को खूब सराहना मिली।

महारुद्र यज्ञ के सांस्कृतिक मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ सौरभ कुमार श्रीवास्तव ने दीप जलाकर किया। पूज्य उड़िया बाबा जी के आशीर्वचन के पश्चात् कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं के द्वारा उपस्थित जन समूह को झूमने पर मजबूर कर दिया। सरस्वती वंदना के पश्चात् शिवजी पांडेय रसराज ने 'पेड़ रुख ना रही त कहां जइब ए सुगना' गाकर पर्यावरण असंतुलन पर करारा कटाक्ष किया। 

शशि प्रेमदेव ने 'शहर में हूं मगर मुझमें अभी तक गांव बाकी है' द्वारा गांव से कटते हुए संबंध और उनकी विकृतियों को रेखांकित किया। विंध्याचल सिंह ने 'हम राम जी की कथा सुनाने आये हैं' द्वारा माहौल को भक्ति भाव की ओर मोड़ दिया। सुनील सिंह समाजवादी ने अपनी रचना से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया 'जनितीं कि इहे होई त अइतीं ना बाराती'। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा और श्रोता झूमते रहे। कवि सम्मेलन में बृजमोहन प्रसाद 'अनाड़ी', गया शंकर' प्रेमी', राजेन्द्र सिंह' गंवार, बब्बन सिंह 'बेबस' इत्यादि कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को सुखद अनुभव कराया।

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