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बलिया में बाढ़ : थमा घाघरा का तेवर, लेकिन...

बैरिया, बलिया। सरयू की बाढ़ से लोग परेशान है। सरयू  के जलस्तर में घटाव के बावजूद सुरेमनपुर दियराचंल टापू बना हुआ है। दियराचंल में बाढ़ की स्थिति में सुधार नहीं है। चारों तरफ जल ही जल दिख रहा है। धान, ज्वार के फसलों के अलावा बड़े क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती नष्ट हो गई है। किसानों का हाल बुरा है। कोई उनका पूछनहार नहीं दिख रहा। सुरेमनपुर दियराचंल के गोपाल नगर, मानगढ़, शिवाल मठिया, वशिष्ट नगर सहित आधा दर्जन गांव सरयू के बाढ़ के पानी में अभी भी डूबे हुए हैं। मौके पर न तो कहीं बाढ़ चौकी दिख रही है। ना ही कहीं राहत और बचाव का कार्य बाढ़ क्षेत्र में दिख रहा है। 

शिवाल मठिया, मानगढ़, गोपाल नगर, वशिष्ठ नगर, गुमानी का डेरा, बैजनाथ के डेरा, बकुलहा, टोला फत्तेराय मे धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। मौके पर कहीं भी भौतिक रूप से बाढ़ चौकी नहीं दिखी। गोपाल नगर पुलिस चौकी परिसर में दिन में करीब एक बजे दो आशा बहू इंद्रावती देवी व रेखा देवी मौजूद थी। उन्होंने कहा कि सुबह से ही हम लोग दवा के इंतजार में बैठे हैं। अभी तक कोई नहीं आया है। फोन आया था की चिकित्सीय टीम आ रही है। 

इस बावत पूछने पर तहसीलदार बैरिया संजय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकी पर सभी मौजूद हैं। हमारे नायब तहसीलदार भी जा रहे हैं। नायब तहसीलदार अजय सिंह करीब डेढ़ बजे गोपाल नगर दियराचंल की तरफ वाहन से जाते दिखाई दिए। दूसरी तरफ गोपाल नगर के राजकुमार यादव, मानगढ़ के संजय यादव, शिवाल मठिया के ओमप्रकाश सिंह, वीरेंद्र सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक राहत और बचाव के नाम पर प्रशासन द्वारा कुछ भी नहीं किया गया है। केवल शिवाल मठिया में दो, गोपाल नगर में दो व वशिष्ठ नगर में दो नाव की व्यवस्था प्रशासन ने की है।

चिकित्सीय टीम ने बाढ़ पीड़ितों में बांटी जरुरी दवाएं

सुरेमनपुर दियराचंल के बैजनाथ के डेरा पर नायब तहसीलदार अजय सिंह की देख रेख में चिकित्सीय टीम ने बाढ़ पीड़ितों में जरुरी दवाओं का वितरण किया। वहीं उन्हें जरूरी टिप्स दिए। हालांकि दियराचंल में ना तो एंबुलेंस दिखी, ना पशु चिकित्सक, ना ही कोई वरिष्ठ अधिकारी। ऐसे में बाढ़ पीड़ितो का कहना था कि  प्रशासन का दावा केवल मौखिक है। धरातल पर राहत और बचाव का सख्त अभाव है। 

बाढ़ ने तोड़ी किसानों की कमर

सुरेमनपुर दियराचंल के आधा दर्जन गांव के दियारे में सैकड़ों एकड़ क्षेत्रफल में बोई गई परवल, गोभी, बैगन, टमाटर सहित अन्य हरी सब्जियों की फसल बाढ़ के पानी में डूब कर नष्ट हो गई। वही किसान बताते हैं कि इस बाढ से खरीफ की फसल को नुकसान होने के साथ-साथ रवि की फसल भी पछैती होने की आशंका प्रबल हो गई है। क्योंकि अगर एक सप्ताह में भी बाढ़ का पानी निकल जाता है, तो खेत जोतने बोने लायक होने में कम से कम बीस दिन लगेंगे।

भूसा का इंतजाम नहीं

दियराचंल मे बाढ़ कारण लोग परेशान है। मवेशियों के लिए चारा की समस्या गम्भीर है। पशुपालक प्रशासन की ओर टुकुर टुकुर देख रहे है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई इन्तजाम नही हुआ है। बार बार बाढ़ पीड़ित भूसा की मांग कर रहे है।


शिवदयाल पांडेय मनन

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