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Flood In Ballia : अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर 40 हजार की आबादी, संकट में जिन्दगी

बैरिया, बलिया। घाघरा की बाढ़ से सुरेमनपुर दियराचंल में हाय तौबा मचा हुआ है। तीन दिनों से बाढ़ में डूबे सुरेमनपुर दियराचंल के आधा दर्जन से अधिक गांवो में कूप अंधेरे का राज कायम हो चुका है। प्रशासन ने  बिजली काट दिया है। मिट्टी तेल का कहीं अता पता नहीं है। लगभग 40 हजार की आबादी अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर है। महिलाएं सरकार के प्रति अति आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि बाढ़ के साथ जहरीले जीव-जंतु भी बाढ़ के पानी में बह कर आए हैं। अंधेरे में हमेशा खतरा बना रहता है।

गौरतलब है कि पूरा दियराचंल सरयू के बाढ़ के पानी में डूब गया है। तीन दिन पहले ही एतियात के तौर पर बिजली विभाग ने पूरे दियराचंल की बिजली काट दिया है, किंतु न तो प्रशासन द्वारा जनरेटर की व्यवस्था की गई है नहीं बाढ़ प्रभावित लोगों को मिट्टी तेल ही उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में पूरी रात लोग रतजगा कर रहे हैं। अंधेरे में लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

मानगढ़, शिवाल मठिया, गोपाल नगर, गोपाल नगर टाड़ी, वशिष्ठ नगर, गुमानी के डेरा, टोला फत्तेराय सहित दियराचंल के सभी गांव में गांव के भीतर तक पानी घुस चुका है। खेतों में खड़ी सभी फसलें चाहे वह मक्का हो, धान हो, ज्वार हो या सब्जी की खेती सब कुछ बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। सैकड़ों घरों के भीतर तक पानी घुस गया है। मौके पर लेखपाल के अलावा शासन प्रशासन का कोई भी नुमाइन्दा नहीं पहुंचा है। नहीं राहत और बचाव का ही कोई अता पता है। लेखपाल की मानें तो दो नाव गोपाल नगर में लगाई गई है। शेष गांवो के लिए नाव  मगांई जा रही हैं।


फसल डूबी, किसानों की बढ़ी चिन्ता

बाढ में किसानों की फसल डूब गयी है। मानगढ़ निवासी राम दर्शन यादव, धनजी यादव, अर्जुन यादव, रामेश्वर यादव, जयप्रकाश राम, काशीनाथ यादव सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि धान और मक्के की फसलों के साथ-साथ बड़े भूभाग में बोई गई सब्जी की खेती भी सरयू  के बाढ़ के पानी में डूबने से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।किसानों पर मानो दुखों का पहाड़ टूट कर गिरा हुआ है। राहत और बचाव की तो बात दूर, अधिकारी हम लोगों का हाल-चाल जानने के लिए भी मौके पर नहीं आए हैं। घरों के चूल्हे ठंडे हो गए हैं। बिजली काट देने से मोबाइल नेटवर्क भी समाप्त हो गया है। बाढ़ पीड़ितों ने जिलाधिकारी से सहायता की गुहार लगाई है।

बाढ़ से टूटा गांव में घरों का आपसी सम्पर्क

अचानक बाढ़ का पानी बढ़ने से शिवाल मठिया, गोपाल नगर गांव में घरों का आपसी संपर्क टूट चुका है। क्योंकि गांव की गलियां व सड़कों पर बाढ़ का पानी बह रहा है। ऐसे में लोगों के घरों में जरूरत के सामानों की कमी हो गई है। जरूरत के लिए समान लाना है तो लोगों को जान जोखिम में डालकर। लोग कमर से गर्दन तक बाढ़ की पानी में चलकर सुरेमनपुर या अन्य क्षेत्रों में जाकर सामान खरीद कर लाते है। लोगों ने तत्काल नाव की व्यवस्था कराने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।

बाढ़ चौकी का अता-पता नहीं

मुख्यमन्त्री बाढ़ और बाढ़ पीड़ितो के प्रति गम्भीर है। वही सुरेमनपुर दियराचंल के बाढ़ के पानी में डूबे गांव के आसपास कहीं भी बाढ़ चौकी अस्तित्व में नहीं है। न तो क्षेत्र में चिकित्सक जा रहे हैं। नहीं पशु चिकित्सक, पूरी तरह सुरेमनपुर दियराचंल के लोग भगवान भरोसे हैं।मरना और जीना उनके भाग्य पर निर्भर है। प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों ने पूरी तरह संवेदनहीन होने का आरोप लगाया है।

पशु चारा का संकट

सुरेमनपुर दियराचंल के बाढ पीड़ित पशु पालकों के सामने मवेशियों के लिए चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। इससे पशुपालक परेशान हो गए हैं। तहसील प्रशासन पशु चारा के संबंध में कुछ भी उत्तर देने को तैयार नहीं है। ऐसे में बेजुबानो का कैसे कैसे पेट भरा जाए, यह बाढ़ पीड़ितों के लिए समस्या बनी हुई है।


शिवदयाल पांडेय मनन

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