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बलिया : घाघरा का रूख थोड़ा नरम, पर तबाही बरकरार ; दर्जनों गांवों में घुसा बाढ़ का पानी


अजीत पाठक
सिकंदरपुर, बलिया। बीते दस दिनों से तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में अपनी लपकती लहरों से ग्रामीणों की नींद हराम करने वाली सरयू (घाघरा) की धारा अब थमने लगी है। हालांकि इस दौरान खतरा बिंदु से एक मीटर 67 सेमी ऊपर बह रही सरयू ने इलाके में जमकर तांडव मचाया है। तहसील क्षेत्र के विहरा, कठौड़ा, लीलकर, जमुई, खरीद, सिसोटार, पुरुषोत्तम पट्टी व निपनिया के सैकड़ो घरों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगबाग अपना आशियाना छोड़ कर रिंग बंधे पर शरण लिए हुए हैं। 

इस बीच रविवार की सुबह क्षेत्रीय लोगों के लिए राहत भरी रही। नदी के जल स्तर में कमी होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी जलस्तर घटने की दर काफी धीमी है पर उम्मीद जताई जा रही है कि एक दो दिन में जल स्तर काफी घट जाएगा। लीलकर निवासी विनोद कुमार ने बताया कि तीन दिनों से बंधे पर रह रहे हैं लेकिन अभी तक किसी भी तरह का शासनिक या प्रशासनिक सुविधा मुहैया नहीं कराया गया है। यहां तक कि नाव की भी व्यवस्था नही की गई है। इसके चलते सैकड़ो लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। साथ ही मवेशियों को चारा तक नही मिल पा रहा है।

सांसद ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का किया दौरा

सरयू के जलस्तर में वृद्धि से उत्पन्न हालात से रूबरू होने के लिए सांसद रविंद्र कुशवाहा ने क्षेत्र के डूहा विहरा, कठौड़ा, लिलकर, जमुई, सिसोटार, बसारिख पुर सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान लोगों को  जल्द से सुविधा मुहैया कराने का आश्वासन भी दिया।

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