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Teachers Day : पढ़िए बलिया के इन 10 शिक्षकों की कहानी, जो छू लेगी आपका दिल

बलिया। देश के पहले उपराष्‍ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्‍ली राधाकृष्णन के जन्‍मदिवस, हर साल 5 सितम्बर को पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है, यानी आज शिक्षक दिवस है। किसी भी इंसान के जीवन में यदि माता-पिता के बाद सबसे अधिक महत्व होता है तो वह शिक्षक का ही होता है। वो शिक्षक जरूरी नहीं है कि आपके स्कूल, कॉलेज या अन्य शिक्षण संस्थान के हों, बल्कि एक शिक्षक आपके पेरैंट्स, दोस्त, भाई-बहन कोई भी हो सकता है, जो आपके पथ-प्रदर्शक के रूप में काम करता है।शिक्षक ही अपने विद्यार्थी के ज्ञान का एकमात्र सहारा होता है। आज भी समाज में ऐसे शिक्षक हैं जिनकी कर्मठता, सदाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके कार्यों से शिक्षक समाज का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है। उनके लिए किसी शिक्षक दिवस की जरूरत नहीं है, हर दिन उनके लिए शिक्षक दिवस है। शिक्षक दिवस पर हम आपको बलिया के ऐसे ही 10 शिक्षकों से रूबरू करा रहे हैं, जिनकी मेहनत, कर्तव्यनिष्ठ और लगन की कहानी आपके दिल को छूं लेगी। 

ये होती है बच्चों के प्रति सच्ची निष्ठा


अपने और माता-पिता के सपनों को तो लगभग हर इंसान साकार करने की इच्छा रखता है। यह अच्छा भी है, लेकिन ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो गरीब और अभावहीन बच्चों के सपनों को पूरा करना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं। जी हां, कुछ ऐसी ही कहानी है शिक्षा क्षेत्र चिलकहर के UPS हरिहरपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिता पाण्डेय की। विद्यालय में शिक्षक की कमी हुई तो शिक्षिका अनिता पाण्डेय पति का साथ मांगी। फिर भी छात्र संख्या के हिसाब से टीचर कम थे, लिहाजा गांव के तीन लोगों को शिक्षण कार्य में सहयोग ली। उन्हें अपने वेतन से 'पगार' भी दी। विद्यालय के बाद अभिभावक से लगातार  संपर्क बनाए रखने, उच्चाधिकारियों से आदेशित सभी रिपोर्ट्स और कागजी कार्य ससमय प्रेषित करने के साथ ही स्कूल के बच्चों की बेहतरी को हर संभव प्रयासरत अनिता पाण्डेय की जितनी सराहना की जाय, कम है। 

'तिवारी सर' से विख्यात है शिवप्रकाश


शिवप्रकाश तिवारी, शिक्षा क्षेत्र बेलहरी के कम्पोजिट विद्यालय बजरहां पर गणित शिक्षक के रूप में तैनात है। इनके शिक्षण कौशल का न सिर्फ बच्चे, बल्कि शिक्षक भी कायल है। मृदुल भाषा शैली के बदौलत कक्षा को रूचिकर बनाने की क्षमता इनकी विलक्षण है। ड्राप आउट बच्चों को स्कूल का नियमित छात्र बना देना, इनकी उपलब्धि है। हमेशा बच्चों को निराशा से उबारना, उदासी को पुचकारना, उत्साह को सही दिशा देना इनकी प्राथमिकता में शुमार है। शिवप्रकाश जी, बतौर केआरपी शिक्षकों को प्रशिक्षण देते है तो प्रशिक्षण हाल पूरी तरह शांत हो जाता है। उन्हें लोग सुनते है। उनसे कुछ नया सीखते है। समय और कर्तव्य के प्रति हमेशा सजग रहने वाले शिवप्रकाश जी को सभी शिक्षक आदर से 'तिवारी सर' कहकर पुकारते है। 

शिक्षण प्रक्रिया को आसान बनाने में माहिर है शिक्षिका मोनिका वर्मा 

शिक्षा क्षेत्र बेरूआरबारी के प्राथमिक विद्यालय मिश्रवलिया पर तैनात शिक्षिका मोनिका वर्मा सितंबर 2018 से सेवा शुरू की है। विभाग द्वारा  चलाए जा रहे ससामयिक योजना को निरंतर कार्यरूप देना व छोटे-छोटे बच्चों को खेल-खेल में ऐसी शिक्षा देना, जिससे कि वो लगातार स्कूल आने को उत्सुक रहे। शिक्षण प्रक्रिया को आसान बनाने में माहिर शिक्षिका मोनिका वर्मा आज के उस शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणा है। बच्चों को कुछ बेहतर बनाने और शिक्षा के प्रति इनके जुनून  का हर कोई कायल है। मोनिका वर्मा बताती है कि बच्चों की बेहतरी के लिए थोड़ी सी मेहनत मैंने की, थोड़ी बच्चों से कराई। कमजोर बच्चों पर फोकस रखी, नतीजा पॉजीटिव मिला। बच्चों का शैक्षणिक उत्थान देख आत्म संतुष्टि मिलती है। 

स्वच्छ और सुन्दर कैम्पस से परिपूर्ण विद्यालय की संकल्पना को किये साकार

शिक्षा क्षेत्र नगरा के कंपोजिट विद्यालय मसूरिया पर राणा प्रताप सिंह बतौर प्रधानाध्यापक तैनात है। स्वच्छ और सुन्दर कैम्पस से परिपूर्ण विद्यालय की संकल्पना को साकार करने वाले राणा प्रताप सिंह अपने अनुभव और कार्यशैली से विद्यालय को ब्लॉक ही नहीं, जनपद के श्रेष्ठ विद्यालय में शामिल करा चुके है। छात्रों के सर्वांगीण विकास को समर्पित राणा प्रताप सिंह नित नये नवाचारों के बदौलत छात्रों के प्रिय बने रहते है। बच्चों की शिक्षा से संबन्धित शायद ही कोई ऐसी सामग्री होगी, जो विद्यालय में उपलब्ध न हो। इन्होंने महापुरुषों की जयंती, सुविचार, कविता, कहानी समेत अन्य जानकारियों का ढेर कलेक्शन किया है, जो बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करते हैं।

आदर्श सन्दर्भदाता और प्रभावी शिक्षक में शुमार है नंदलाल शर्मा का नाम


नन्द लाल शर्मा, शिक्षा क्षेत्र सीयर के प्राथमिक विद्यालय तेतरा के प्रधानाध्यापक है। कर्तव्य के प्रति समर्पित नन्द लाल शर्मा जी राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त अध्यापक है। विद्यार्थी जीवन से ही समय के पाबंद, अनुशासन प्रिय, कुशल वक्ता नन्द लाल शर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में आने के बाद जहां भी रहे, वहां एक अलग पहचान बनाये। एक आदर्श सन्दर्भदाता, प्रभावी शिक्षक के साथ आप यू ट्यूबर भी है। सदैव बच्चों व विभाग की उन्नति के प्रति संवेदनशील रहने वाले नंदलाल शर्मा का स्कूल बहुत ही सुंदर है। उनके पढ़ाने का तरीका जरा हटकर है। वे बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ सफल लोगों की सफलता की कहानियां सुनाकर बच्चों को सफल बनने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसका असर भी छात्रों पर दिख रहा है। 

अब पारंपरिक वेशभूषा नहीं, प्राइवेट स्कूल जैसे ड्रेस कोड में नजर आते हैं बच्चे


दुबहर में स्थित रामसिंहासन इंटर कालेज को देख सरकारी स्कूलों के प्रति सोच बदल जाती है। इस सरकारी कालेज के सभी बच्चे सरकारी स्कूलों की तरह पारंपरिक वेशभूषा में नहीं, बल्कि स्कूल के माफिक ड्रेस कोड में नजर आते हैं। इसका श्रेय यहां के गणित शिक्षक उत्तम कुमार गिरी को दिया जाता है। कभी इसी स्कूल के छात्र रहे उत्तम कुमार गिरी की सोच यहां इसलिए और जिम्मेदार हो जाती है कि उनको पढ़ाने वाले सत्येन्द्र कुमार पांडेय, गोवर्द्धन पांडेय, आदित्य शरण, हृदयाशंकर पांडेय व ओमप्रकाश पांडेय भी अध्यापन कार्य में जुड़े है। यहां बतौर शिक्षक तैनाती के बाद उत्तम कुमार गिरी ने कड़ी मेहनत और लगन से न केवल स्कूल की दशा बदल प्राइवेट जैसा कर दिया, बल्कि ग्रामीणों को बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रेरित भी किया। उत्तम गिरी बताते है कि यह सब अकेले नहीं, विद्यालय के अन्य शिक्षकों के सहयोग से सम्भव हो सका है। स्कूल में नामांकित छात्र न सिर्फ समय से, बल्कि ड्रेस कोड में पढ़ने आते है। सुचारू कक्षाएं चलती है। बच्चों के चातुर्दिक विकास पर काम हो रहा है। 

लगन और सकारात्मक सोच बनी शिक्षिका नेहा की पहचान


श्रीमती नेहा यादव प्रभारी प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय मुजौना शिक्षा क्षेत्र सीयर ने बहुत कम समय में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है। बच्चों के बीच नित नए टीएलएम का प्रयोग व आकर्षक विद्यालय परिवेश के लिए ब्लॉक व जनपद स्तर पर सम्मानित हो चुकी नेहा यादव का कार्य नए व पुराने अध्यापको को प्रेरणा देता है। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण व सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर इनकी लगन और सकारात्मक सोच पहचान बन चुकी है। 

छात्रों की बेहतरी को कृतसंकल्पित है प्रभाकर

शिक्षा क्षेत्र नगरा के कम्पोजिट वाराडीह लवाई पट्टी पर तैनात शिक्षक प्रभाकर गुप्ता छात्रों की बेहतरी को कृतसंकल्पित है। बच्चों की नियमित उपस्थिति पर बारीक नजर रखने वाले प्रभाकर विद्यार्थियों को पाठयक्रम ज्ञान, समझ के साथ-साथ व्यवहारिक व्याख्यान व मनोरंजक गतिविधियों से शिक्षित करते है। ग्रीष्मावकाश में भी लगातार 25 दिन ऑनलाइन कक्षा का बुनियादी व पाठयक्रम से संबंधित संचालन कर इन्होंने बच्चों के प्रति अपनी समर्पणता का परिचय दिया। पृथ्वी श्रृंगार और हरा भरा संसार सम्मान से सम्मानित हो चुके प्रभाकर बच्चों और अभिभावकों को हमेशा शिक्षा के प्रति जागरूक करते है। बतौर प्रभाकर गुप्ता, मेरी प्राथमिक भूमिका बच्चों को सुरक्षित वातावरण और उचित शिक्षा देना हैै। बुनियादी, पाठयक्रम, कक्षा परीक्षण, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विशेष दिवसों इत्यादि पर कार्यक्रम कराकर बच्चों में प्रोत्साहन के तौर पर मेडल, प्रशस्ति पत्र, ड्राइंग नोटबुक, क्रेयांस, कलम-कॉपी देकर सम्मानित करना, बच्चों के जन्मदिवस पर कुछ न कुछ तोहफा और अपना भी जन्मदिन बच्चों के साथ मनाना, बच्चों की सुविधाओं का ख्याल रखना, इनकी दिनचर्या में शुमार है। 

पार्थेश सिंह, निराला है पढ़ाने का अंदाज

पार्थेश सिंह, कन्या प्राथमिक विद्यालय असनवार पर सहायक अध्यापक है। साफ सफाई के साथ नियमित स्कूल आने के लिए विभिन्न प्रयोगों से बच्चों को प्रोत्साहित करना और प्रत्येक बच्चो से मित्रवत संवाद स्थापित कर, पठन पाठन कार्य को रुचिकर बनाने वाला इनका अंदाज निराला है। बच्चों को हंसते-हंसते इंग्लिश में माह, day's, alphabets, organ नाम याद कराने की कला कोई इनसे सीखे। गणित किट के माध्यम से नंबर्स और जोड़ घटाना को व्यावहारिक स्तर पर करा देने में माहिर पार्थेश सिंह खेल-खेल में बच्चों को इस कदर पढ़ाते है, कि बच्चा बहुत जल्द उसे याद कर लेता है। 

विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने में जुटे है गंगदेव पाठक

प्राथमिक विद्यालय बेलसरा नं. 2 पर कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापक गंगदेव पाठक स्वयं के प्रयास से विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने के प्रयास में जुटे है। अभिभावकों को शिक्षा के महत्व को समझा कर विद्यालय के प्रति सकारात्मक सोच जागृत कर बच्चों का नामांकन बढ़ाने और गतिविधियों तथा नए-नए तरीकों से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने की कला तो बेहतर है ही, दीक्षा एप्प एवं रीड ए लोंग एप का अधिकाधिक प्रयोग एवं खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से आज विद्यालय का माहौल ऊर्जावान और सकारात्मक बन चुका है। अन्य शिक्षकों के सहयोग से आईसीटी प्रयोग के लिए स्मार्ट क्लास भी संचालित है। 

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