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राष्ट्र भाषा हिन्दी : आओ साक्षात्कार करें हम, करती सुखद विहान है...

राष्ट्र भाषा हिन्दी


हिन्द देश के हम है वासी, हिन्दूत्व मेरी पहचान है।
राष्ट्र की मेरी भाषा हिन्दी, माता तुल्य महान है।
सरस सरल समृद्धिशाली, यह मां गंगा सी पावन है।
प्रेम सुधा बरसाने वाली, मधुर गेय सुहावन है। 
मानवता का पाठ पढ़ाती, अद्भुत गुणों की खान है।
राष्ट्र की मेरी भाषा हिन्दी, माता तुल्य महान है।
श्रृंगारिक यह बोधगम्य नित प्रेम की ज्योति जलाती है।
रस छन्द से परिपूर्ण अन्तःकलह मिटाती है।
जन-जन के मन बसने वाली, वीणावाली की तान है।
राष्ट्र की मेरी भाषा हिन्दी, माता तुल्य महान है।
शब्दों की भण्डार है हिन्दी, भाषाओं की महारानी है।
हर जुबान पर बसने वाली विश्व वंद्य कल्याणी है।
आओ साक्षात्कार करें हम, करती सुखद विहान है।
राष्ट्र की मेरी भाषा हिन्दी, माता तुल्य महान है।
शीश झुकाकर ध्यान लगायें, निशिदिन ज्ञान बढ़ायें हम।
मां की महिमा की गुणगाथा, दुनिया में फैलायें हम।
अज्ञानता को मिटाने वाली स्वर्णिम सुखद दयावान है।
राष्ट्र की मेरी भाषा हिन्दी, माता तुल्य महान है।।


श्रीशचंद्र पाठक 
वरिष्ठ साहित्यकार
सांसद आदर्श ग्राम ओझवलिया
बलिया,   उत्तरप्रदेश

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