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Ballia News : स्वास्थ्य विभाग को सवालों के कटघरे में छोड़ गई युवक की मौत

बलिया। पीएचसी मनियर पर डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में युवक की मौत, अपने पीछे कई सारे सवाल छोड़ गई है। लोग यह जानना चाहते है कि व्यवस्था की मार हम कब तक झेलेंगे ? परिजन कह रहे है कि अस्पताल पर डाक्टर होते तो उनके मरीज की जान बच सकती थी, लेकिन अफसोस ! वहां डाक्टर मौजूद नहीं थे, पर क्यों? सरकार की सख्ती के बाद भी स्वास्थ्य महकमे में इतनी लापरवाही क्यों?आखिर तैनाती स्थल पर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी रुकना क्यों नहीं चाहते ? वैसे बांसडीह सीएचसी के बाद मनियर पीएचसी पर ऐन वक्त पर चिकित्सकों की ना-मौजूदगी मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पर शायद ही इसका असर पड़े।

गौरतलब हो कि मनियर थाना क्षेत्र के दुरौंधा गांव निवासी राजकुमार उर्फ छोटू राजभर (38) शनिवार को पंखे का प्लग बोर्ड में लगाते वक्त करंट की जद में आ गया। आनन-फानन में उसे पीएचसी पहुंचाया गया, लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं था। बताया जा रहा है कि कुछ देर बाद एक फॉर्मासिस्ट आया, देखा और मृत होने की संभावना जताकर चला गया। वहीं, परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। आरोप लगाया कि यदि अस्पताल में सही समय में इलाज मिल जाता तो छोटू जिंदा होता। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

बता दें कि बांसडीह में टेंपो और बाइक की टक्कर में पांच बच्चे सहित 10 लोग घायल हो गए थे। घायलों को सीएचसी, बांसडीह पहुंचाया गया था, पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। फार्मासिस्ट व एक अन्य स्टाफ ने उपचार शुरू किया, तभी पहुंचे आयुष चिकित्सक भी घायलों का इलाज किया।मामले में डीएम ने संज्ञान लिया और डॉक्टर को निलंबित कर दिया। इसी बीच, पीएचसी मनियर में चिकित्सक के न होने का मामला सामने आया है। 

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