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राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित तीन शिक्षकों के अलावा बलिया के 44 Teacher सम्मानित, डॉ. निर्मला को मिला मंत्री का बड़ा आश्वासन

कलेक्ट्रेट सभागार में शिक्षक दिवस सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मंत्री दयाशंकर सिंह

अध्यापक अपना दायित्व समझें और उसका निर्वहन ईमानदारी से करें: नीरज शेखर

बलिया। कलेक्ट्रेट सभागार में 'शिक्षक दिवस सम्मान समारोह' का आयोजन सोमवार को हुआ। राज्य पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिका डॉ. निर्मला गुप्ता के सम्मान में आयोजित इस समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 44 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोह का शुभारंभ करने के साथ ही मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सांसद नीरज शेखर के साथ शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। 


मंत्री दयाशंकर सिंह ने राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त करने वाले डॉ. निर्मला गुप्ता तथा संस्कृत विद्यालय के शिक्षक शिवानंद यादव व भरत राम को बधाई का पात्र और अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कहा कि राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली शिक्षिका डॉ. निर्मला गुप्ता की चुनौतियों भरी कहानी प्रेरित करती है कि अभाव व सीमित संसाधनों में भी बेहतर से बेहतर किया जा सकता है। ब्रिटिश हुकूमत के समय के ऑक्सफोर्ड की कहानी साझा करते हुए कहा कि शिक्षक से बड़ा कोई नहीं होता है। माता-पिता के बाद शिक्षक ही सिर्फ ऐसा व्यक्ति होता है, जो यह चाहता है कि उसका शिष्य उससे भी आगे और सफलता की बुलंदियों पर जाए। 


निर्मला जी के विद्यालय पर जो भी कमी होगी, उसे दूर कराया जाएगा। इसके लिए अपनी निधि के अलावा सीएसआर फंड से धन दिलवाने का भी आश्वासन दिया। उस विद्यालय को एक मॉडल व आदर्श विद्यालय बनाने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश बीएसए को दिया। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन करते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी अध्यापक अपने दायित्वों को समझें और उसका निर्वहन ईमानदारी से करें।

मां को समर्पित किया सम्मान

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद शिक्षिका डॉ. निर्मला गुप्ता ने कहा कि इस सम्मान से निश्चित रूप से मेरा उत्साह बढ़ा है। अपनी मां को यह सम्मान समर्पित करती हूं, क्योंकि हमारी मां ने घर से विरोध कर मुझे पढ़ाया-लिखाया। उच्च शिक्षा ग्रहण करने में हर क्षण मदद की। इंटर की पढ़ाई के दौरान शादी हो गयी। उसके बाद तमाम प्रतिकूल परिस्थिति आयी, पर मैं हिम्मत नहीं हारी। अपनी पढ़ाई जारी रखी। 

2006 में शिक्षिका होने के बाद से बच्चों के प्रति पूरी तरह समर्पित रही। भवन व अन्य कई प्रकार की समस्या आयी, पर सीमित संसाधनों के बीच ही पढ़ाई के अलावा खेलकूद, कौशल विकास व नए-नए शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को स्मार्ट बनाने का प्रयास की। अंत में समस्त अध्यापकों को सन्देश दिया कि राष्ट्र के कर्णधार बच्चों के कर्णधार बनें, उनके भविष्य को संवारने के प्रयास पूरी ईमानदारी से करें। 

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का हुआ सीधा प्रसारण

शिक्षक दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का भी सीधा प्रसारण दिखाया गया। मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर समेत मौजूद सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व शिक्षकों ने कार्यक्रम को देखा और मुख्यमंत्री जी के सम्बोधन को सुना।


इस अवसर पर डीआईओएस रमेश सिंह, बीएसए मनीराम सिंह, लेखाधिकारी हिमांचल यादव, बीईओ डीपी सिंह, राकेश सिंह, माधवेन्द्र पांडेय, रत्नशंकर पांडेय, अनूप गुप्ता, हिमांशु मिश्र, जिला समन्वयक सौरभ गुप्ता व ओपी सिंह, ज्योति प्रकाश चौहान, अभिषेक सिंह, प्राशिसं जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, शिक्षामित्र संगठन के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह व अखिलेश सिंह, अजय मिश्र, विद्यासागर दूबे आदि मौजूद थे। संचालन राजेश पांडेय ने किया।







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