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बलिया की दिशा और दशा बदलने वाला होगा सीएम योगी के साथ जुड़ा यह रिकार्ड


बलिया से अजीत पाठक की खास रिपोर्ट

भले ही देश अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा हो, लेकिन वीरों की धरती और जवानों के देश में 'बागी बलिया' के नाम से मशहूर जिला अपनी आजादी की 81वीं वर्षगांठ को सेलिब्रेट कर रहा है। यह सर्व विदित है कि 19 अगस्त 1942 को ही जिले के रणबाकुरों ने अपनी शहादत देकर न सिर्फ ब्रितानी हुकूमत को घुटने के बल कर दिया था, अपितु स्वयं को स्वतंत्र भी घोषित कर दिया था। 

यही नहीं जिला जेल की ऊंची दीवारों के ओट में रखे गए अपने साथियों को मुक्त करा कर स्वतंत्रता की महकती खुशबू से सराबोर कराते हुए जिला की प्रशासनिक बागडोर भी थाम ली थी। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि रक्त के कतरे से मां भारती को सींचने वाले उन सैकड़ों वीरों ने अपने बगावती तेवर से सात समंदर पार बैठे हुक्मरानों की नींद उड़ा दी थी। शायद इसी वजह से बलिया को बागी बलिया भी कहा जाता है।

तब से लेकर अब तक हर साल 19 अगस्त को जिला जेल का फाटक खुलता है और आजादी के दीवाने बाहर निकलते हैं। यूं तो यह परंपरा पिछले सात दशक से चल रही है, लेकिन 75 वर्षों के इतिहास में कभी भी किसी सरकार ने इन बलिदानियों को उनकी शहादत दिवस पर उनकी धरा पर आकर सम्मानित करने की जहमत नहीं उठाई। शुक्रवार को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब जिला जेल का फाटक खटखटाया तो साकेत पूरी में विराजमान शहीदों की आत्माएं भी तृप्त हो उठीं। उन पुण्य आत्माओं की धन्यता और दिव्यता ही थी कि कार्यक्रम समाप्ति के कुछ घण्टे बाद ही इंद्र देव ने अपनी अमृतमयी बूंदें बरसाकर बागी धरती को भी अभिसिंचित कर दिया। 

बहरहाल, पिछले साढ़े सात दशक से अपेक्षित विकास की राह देख रहे जनपद को मुख्यमंत्री ने नई ऊर्जा देने का काम किया है। बमुश्किल आधे घण्टे के अपने सम्बोधन में सीएम ने हर उस पहलू को रखा, जिसकी दरकार यहां के लोगों को है। मूलभूत सुविधाओं से लगायत विकास के नवीन प्रतिमानों के अनुरूप इसे सुसज्जित करने का जो खाका मुख्यमंत्री ने खींचा है, वह काबिल-ए-तारीफ है। 

बेशक यदि उन घोषणाओं को मूर्त रूप दे दिया गया तो यह जिले की दशा और दिशा बदलने वाला साबित होगा। खास कर यदि ऐतिहासिक जिला जेल को स्मारक में तब्दील करने की योजना साकार रूप लेती है तो यह सौभाग्य होगा। वर्षों से अपने पूर्वजों के इतिहास से अनजान युवा पीढ़ी भी उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से परिचित हो सकेगी। यही नहीं, इससे उन महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अमर गाथाएं भी समय के भाल पर चमकती नजर आएगी।

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